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Alankrat Srivastava
meraa jeevan bhi maran bhi raam hain
meraa jeevan bhi maran bhi raam hain | मेरा जीवन भी मरण भी राम हैं
- Alankrat Srivastava
मेरा
जीवन
भी
मरण
भी
राम
हैं
और
आख़िर
में
शरण
भी
राम
हैं
- Alankrat Srivastava
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न
जाने
ख़त्म
हुई
कब
हमारी
आज़ादी
तअल्लुक़ात
की
पाबंदियाँ
निभाते
हुए
Azhar Iqbal
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वो
एक
दिन
जो
तुझे
सोचने
में
गुज़रा
था
तमाम
उम्र
उसी
दिन
की
तर्जुमानी
है
Abhishek shukla
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शरीफ़
इंसान
आख़िर
क्यूँ
इलेक्शन
हार
जाता
है
किताबों
में
तो
ये
लिक्खा
था
रावन
हार
जाता
है
Munawwar Rana
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सुलग
रहे
थे
शजर
दिल
तमाम
भँवरों
के
दिल
अपना
वार
रहा
था
कोई
रुख़-ए-गुल
पर
बहुत
मलाल
हुआ
देखकर
गुलिस्ताँ
में
तमाचा
मार
रहा
था
कोई
रुख़-ए-गुल
पर
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Shajar Abbas
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मिरे
सलीक़े
से
मेरी
निभी
मोहब्बत
में
तमाम
उम्र
मैं
नाकामियों
से
काम
लिया
Meer Taqi Meer
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कीजे
इज़हार-ए-मोहब्बत
चाहे
जो
अंजाम
हो
ज़िंदगी
में
ज़िंदगी
जैसा
कोई
तो
काम
हो
Priyamvada ilhan
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चलो
माना
कि
रोना
मसअले
का
हल
नहीं
लेकिन
करे
भी
क्या
कोई
जब
ख़त्म
हर
उम्मीद
हो
जाए
Bhaskar Shukla
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तमाम
जिस्म
को
आँखें
बना
के
राह
तको
तमाम
खेल
मुहब्बत
में
इंतिज़ार
का
है
Munawwar Rana
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हुस्न
बला
का
क़ातिल
हो
पर
आख़िर
को
बेचारा
है
इश्क़
तो
वो
क़ातिल
जिसने
अपनों
को
भी
मारा
है
ये
धोखे
देता
आया
है
दिल
को
भी
दुनिया
को
भी
इसके
छल
ने
खार
किया
है
सहरा
में
लैला
को
भी
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Jaun Elia
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यूँँ
दिल
को
तड़पने
का
कुछ
तो
है
सबब
आख़िर
या
दर्द
ने
करवट
ली
या
तुम
ने
इधर
देखा
Jigar Moradabadi
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किसी
शायर
का
कोई
शे'र
यूँँ
बेकार
नईं
होता
मगर
हाँ
हर
किसी
को
हर
किसी
से
प्यार
नईं
होता
Alankrat Srivastava
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ये
लगता
है
कि
सरकारें
बदलने
से
मिलेगा
कुछ
हाँ
लगता
है,
मगर
ऐसा
यहाँ
पर
यार
नइँ
होता
Alankrat Srivastava
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एक
दाना
जिसकी
दानाई
के
हैं
कायल
सब
जन
सब
खो
कर
उसने
सब
पाने
का
लहज़ा
सीखा
है
Alankrat Srivastava
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लिख
रहा
हूँ
अनोखी
ग़ज़ल
दोस्तों
यानी
उसके
बदन
का
बदल
दोस्तों
ज़िन्दगी
जिस
सहारे
मैं
जीता
गया
क्या
हक़ीक़त
में
थे
भी
वो
पल
दोस्तों
कर
तो
लेता
मुहब्बत
दुबारा
अगर
मिल
कहीं
जाती
उसकी
नक़ल
दोस्तों
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Alankrat Srivastava
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अगर
उसको
शिकायत
है
तो
ये
तय
है
मुहब्बत
है
बड़ी
अच्छी
है
सुनने
में
मगर
झूठी
कहावत
है
Alankrat Srivastava
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