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Alankrat Srivastava
likh raha hooñ anokhi ghazal doston
likh raha hooñ anokhi ghazal doston | लिख रहा हूँ अनोखी ग़ज़ल दोस्तों
- Alankrat Srivastava
लिख
रहा
हूँ
अनोखी
ग़ज़ल
दोस्तों
यानी
उसके
बदन
का
बदल
दोस्तों
ज़िन्दगी
जिस
सहारे
मैं
जीता
गया
क्या
हक़ीक़त
में
थे
भी
वो
पल
दोस्तों
कर
तो
लेता
मुहब्बत
दुबारा
अगर
मिल
कहीं
जाती
उसकी
नक़ल
दोस्तों
- Alankrat Srivastava
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देख
मोहब्बत
का
दस्तूर
तू
मुझ
से
मैं
तुझ
से
दूर
कोशिश
लाज़िम
है
प्यारे
आगे
जो
उसको
मंज़ूर
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Nasir Kazmi
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मुहब्बत
के
समुंदर
की
कलाकारी
ग़ज़ब
की
है
कि
सब
कुछ
डूब
जाता
है
मगर
तर
कुछ
नहीं
होता
Muntazir Firozabadi
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हसीं
ख़्वाबों
को
अपने
साथ
में
ढोती
हुई
आंँखे
बहुत
प्यारी
लगी
हमको
तेरी
सोती
हुई
आंँखे
मोहब्बत
में
ये
दो
क़िस्से
सुना
है
रोज़
होते
हैं
कभी
हँसता
हुआ
चेहरा
कभी
रोती
हुई
आंँखे
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Naimish trivedi
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मुहब्बत
उठ
गई
दोनों
घरों
से
सुना
है
एक
ख़त
पकड़ा
गया
है
Anjum Ludhianvi
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यार
तेरी
मुझे
ज़रूरत
है
इक
तू
ही
तो
मेरी
मुहब्बत
है
Arohi Tripathi
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मोहब्बत
नेक-ओ-बद
को
सोचने
दे
ग़ैर-मुमकिन
है
बढ़ी
जब
बे-ख़ुदी
फिर
कौन
डरता
है
गुनाहों
से
Arzoo Lakhnavi
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भाई
बहनों
की
मोहब्बत
का
नशा
मत
पूछिए
बे-तकल्लुफ़
हो
गए
तो
गुदगुदी
तक
आ
गए
Iftikhar Falak Kazmi
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कभी
ये
भी
नहीं
पूछा
है
गर्दन
पे
निशाँ
कैसा
हमें
अंधी
मोहब्बत
थी
हमें
अंधा
भरोसा
था
Shayra kirti
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दिल
में
जो
मोहब्बत
की
रौशनी
नहीं
होती
इतनी
ख़ूब-सूरत
ये
ज़िंदगी
नहीं
होती
Hastimal Hasti
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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अगर
उसको
शिकायत
है
तो
ये
तय
है
मुहब्बत
है
बड़ी
अच्छी
है
सुनने
में
मगर
झूठी
कहावत
है
Alankrat Srivastava
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है
ग़ज़ल
मेरी
पर
है
तेरे
नाम
पर
ला
के
छोड़ा
मुझे
कैसे
अंजाम
पर
Alankrat Srivastava
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बिना
तेरे
अधूरे
मेरे
हर
इक
शे'र
रह
जाते
कि
जैसे
राम
बिन
शबरी
के
सारे
बेर
रह
जाते
तुम्हारे
वास्ते
मैंने
यहाँ
महफ़िल
सजाई
थी
भला
होता
अगर
तुम
और
थोड़ी
देर
रह
जाते
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Alankrat Srivastava
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हर
पल
ना
यूँँ
तुम
गिला
करो
हम
सेे
तुम
खिल
के
मिला
करो
Alankrat Srivastava
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मेरी
तन्हाई
घटाने
के
लिए
साथ
में
मेरे
मेरी
तन्हाई
थी
Alankrat Srivastava
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