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Alankrat Srivastava
hai ghazal meri par hai tere naam par
hai ghazal meri par hai tere naam par | है ग़ज़ल मेरी पर है तेरे नाम पर
- Alankrat Srivastava
है
ग़ज़ल
मेरी
पर
है
तेरे
नाम
पर
ला
के
छोड़ा
मुझे
कैसे
अंजाम
पर
- Alankrat Srivastava
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इश्क़
तिरी
इंतिहा
इश्क़
मिरी
इंतिहा
तू
भी
अभी
ना-तमाम
मैं
भी
अभी
ना-तमाम
Allama Iqbal
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देखो
तो
चश्म-ए-यार
की
जादू-निगाहियाँ
बेहोश
इक
नज़र
में
हुई
अंजुमन
तमाम
Hasrat Mohani
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या'नी
कि
इश्क़
अपना
मुकम्मल
नहीं
हुआ
गर
मैं
तुम्हारे
हिज्र
में
पागल
नहीं
हुआ
वो
शख़्स
सालों
बाद
भी
कितना
हसीन
है
वो
रंग
कैनवस
पे
कभी
डल
नहीं
हुआ
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Kushal Dauneria
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नहीं
है
लब
पे
दिखावे
का
भी
तबस्सुम
अब
हमें
किसी
ने
मुक़म्मल
उदास
कर
दिया
है
Amaan Haider
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मैं
तमाम
दिन
का
थका
हुआ
तू
तमाम
शब
का
जगा
हुआ
ज़रा
ठहर
जा
इसी
मोड़
पर
तेरे
साथ
शाम
गुज़ार
लूँ
Bashir Badr
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हर
एक
चौखट
खुली
हुई
थी
हर
इक
दरीचा
खुला
हुआ
था
कि
उसकी
आमद
पे
दर
यहाँ
तक
कि
बेघरों
का
खुला
हुआ
था
ये
तेरी
हम्म
ने
हमें
ही
उलझन
में
डाल
रक्खा
है
वरना
हम
पर
तमाम
साइंस
के
फ़लसफ़ों
का
हर
एक
चिट्ठा
खुला
हुआ
था
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Saad Ahmad
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दिल-ए-नादाँ
तुझे
हुआ
क्या
है
आख़िर
इस
दर्द
की
दवा
क्या
है
Mirza Ghalib
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तमाम
जिस्म
को
आँखें
बना
के
राह
तको
तमाम
खेल
मुहब्बत
में
इंतिज़ार
का
है
Munawwar Rana
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इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
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तमाम
शहर
की
ख़ातिर
चमन
से
आते
हैं
हमारे
फूल
किसी
के
बदन
से
आते
हैं
Farhat Ehsaas
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देहाती
नहीं
वो
हैं
खेतों
के
मालिक
न
भूलो
के
उनके
सहारे
हो
तुम
सब
Alankrat Srivastava
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बहुत
खोजा
मगर
फिर
भी
किनारा
ना
मिला
मुझ
को
मिला
सबका
मगर
तेरा
सहारा
ना
मिला
मुझ
को
Alankrat Srivastava
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ये
लगता
है
कि
सरकारें
बदलने
से
मिलेगा
कुछ
हाँ
लगता
है,
मगर
ऐसा
यहाँ
पर
यार
नइँ
होता
Alankrat Srivastava
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मोहब्बत
है
होती
जहाँ
हौले
हौले
कि
लो
आ
गए
हम
वहाँ
हौले
हौले
तू
ने
तीरगी
में
जला
कर
के
दीपक
सजाया
ये
मेरा
जहाँ
हौले
हौले
सुनो
तो
सिखा
दूँ
सलीके
मोहब्बत
चली
जाना,
पर
यार,
हाँ!
हौले
हौले
तबाही
चली
भी
गई
सब
चुरा
कर
बुलंदी
है
आती
यहाँ
हौले
हौले
ये
जीवन
कि
कश्ती
में
साँसों
कि
सरगम
है
गुम
हो
गई
सब
कहाँ
हौले
हौले
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Alankrat Srivastava
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उसपे
मरते
हो
तो
उसकी
ख़ामियों
से
बैर
क्यूँ
चाँद
के
'आशिक़
के
हिस्से
दाग़
तो
आएँगे
ना
Alankrat Srivastava
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