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Alankrat Srivastava
lahren kitnii bhi prabal ho ham kinaare hi rahenge
lahren kitnii bhi prabal ho ham kinaare hi rahenge | लहरें कितनी भी प्रबल हो हम किनारे ही रहेंगे
- Alankrat Srivastava
लहरें
कितनी
भी
प्रबल
हो
हम
किनारे
ही
रहेंगे
हम
तुम्हारे
थे
तुम्हारे
हैं
तुम्हारे
ही
रहेंगे
गर
ग़ज़ल
में
बात
उसकी
हो
रही
है
तो
ये
तय
है
कहने
वाले
कोई
भी
हों
शे'र
प्यारे
ही
रहेंगे
- Alankrat Srivastava
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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अभी
से
पाँव
के
छाले
न
देखो
अभी
यारो
सफ़र
की
इब्तिदा
है
Ejaz Rahmani
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बर्बाद
कर
दिया
हमें
परदेस
ने
मगर
माँ
सब
से
कह
रही
है
कि
बेटा
मज़े
में
है
Munawwar Rana
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बंद
कमरे
में
हज़ारों
मील
अब
चलते
हैं
हम
काफ़ी
महँगी
पड़
रही
है
शा'इरी
से
दोस्ती
Ashraf Jahangeer
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मैं
सोचता
हूँ
जब
कभी
आओगी
सामने
किस
मुँह
से
कह
सकूँगा
मोहब्बत
नहीं
रही
Shoonya
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सफ़र
हालाँकि
तेरे
साथ
अच्छा
चल
रहा
है
बराबर
से
मगर
एक
और
रास्ता
चल
रहा
है
Shariq Kaifi
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ज़हीफ़ी
इस
लिए
मुझको
सुहानी
लग
रही
है
इसे
कमाने
में
पूरी
जवानी
लग
रही
है
नतीजा
ये
है
कि
बरसों
तलाश-ए-ज़ात
के
बाद
वहाँ
खड़ा
हूँ
जहाँ
रेत
पानी
लग
रही
है
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Khalid Sajjad
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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मुक़र्रर
दिन
नहीं
तो
लम्हा-ए-इमकान
में
आओ
अगर
तुम
मिल
नहीं
सकती
तो
मेरे
ध्यान
में
आओ
बला
की
ख़ूब-सूरत
लग
रही
हो
आज
तो
जानाँ
मुझे
इक
बात
कहनी
थी
तुम्हारे
कान
में..
आओ
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Darpan
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सुखाई
जा
रही
है
जुल्फ़
धोकर
घटा
या'नी
निचोड़ी
जा
रही
है
Satya Prakash Soni
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ज़माने
में
दिखावे
के
सिवा
कुछ
भी
अगर
होता
सभी
फिर
चैन
से
जीते
सभी
के
पास
घर
होता
तुम्हारी
ही
मुहब्बत
ने
सिखाई
शा'इरी
वरना
बहुत
जी
जान
से
पढ़
कर
फ़क़त
इंजीनियर
होता
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Alankrat Srivastava
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है
बहुत
चीज़ें
मगर
मुझको
तो
आदतन
तुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
है
Alankrat Srivastava
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ये
अजब
दौर
है,
सब
जहाँ
पर
अभी
"लिख
रहे"
हैं
ग़ज़ल
"कह
रहे
हैं"
नहीं
Alankrat Srivastava
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बिना
तेरे
अधूरे
मेरे
हर
इक
शे'र
रह
जाते
कि
जैसे
राम
बिन
शबरी
के
सारे
बेर
रह
जाते
तुम्हारे
वास्ते
मैंने
यहाँ
महफ़िल
सजाई
थी
भला
होता
अगर
तुम
और
थोड़ी
देर
रह
जाते
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Alankrat Srivastava
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मेरा
जीवन
भी
मरण
भी
राम
हैं
और
आख़िर
में
शरण
भी
राम
हैं
Alankrat Srivastava
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