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Alankrat Srivastava
kyuuñ 'aashiq hi samjhte hain yahaañ sab log shayar ko
kyuuñ 'aashiq hi samjhte hain yahaañ sab log shayar ko | क्यूँ 'आशिक़ ही समझते हैं यहाँ सब लोग शायर को?
- Alankrat Srivastava
क्यूँ
'आशिक़
ही
समझते
हैं
यहाँ
सब
लोग
शायर
को?
वजह
इक
ही
है
क्या
दुनिया
में
यूँँ
मातम
मनाने
की?
- Alankrat Srivastava
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लोग
टूट
जाते
हैं
एक
घर
बनाने
में
तुम
तरस
नहीं
खाते
बस्तियाँ
जलाने
में
Bashir Badr
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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शरीफ़
इंसान
आख़िर
क्यूँ
इलेक्शन
हार
जाता
है
किताबों
में
तो
ये
लिक्खा
था
रावन
हार
जाता
है
Munawwar Rana
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आप
की
सादा-दिली
से
तंग
आ
जाता
हूँ
मैं
मेरे
दिल
में
रह
चुके
हैं
इस
क़दर
हुश्यार
लोग
Nomaan Shauque
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अपनी
हस्ती
का
भी
इंसान
को
इरफ़ांन
हुआ
ख़ाक
फिर
ख़ाक
थी
औक़ात
से
आगे
न
बढ़ी
Shakeel Badayuni
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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समझ
से
काम
जो
लेता
हर
एक
बशर
'ताबाँ'
न
हाहा-कार
ही
मचते
न
घर
जला
करते
Anwar Taban
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सारे
ग़म
भूल
गए
आपके
रोने
पे
मुझे
किसको
ठंडक
में
पसीने
का
ख़्याल
आता
है
आखरी
उम्र
में
जाते
है
मदीने
हम
लोग
मरने
लगते
है
तो
जीने
का
ख़याल
आता
है
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Nadir Ariz
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क़ब्रों
में
नहीं
हम
को
किताबों
में
उतारो
हम
लोग
मोहब्बत
की
कहानी
में
मरे
हैं
Ajaz tawakkal
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मत
सहल
हमें
जानो
फिरता
है
फ़लक
बरसों
तब
ख़ाक
के
पर्दे
से
इंसान
निकलते
हैं
Meer Taqi Meer
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हारे
बैठे
हैं
क्यूँ
उसके
आगे
सभी
एक
कन्या
ही
है
वो
सिकंदर
नहीं
Alankrat Srivastava
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लिख
रहा
हूँ
मैं
ऐसी
चिट्ठियाँ
मोहब्बत
में
जैसे
मुझको
मिलनी
हों
डिग्रियाँ
मोहब्बत
में
Alankrat Srivastava
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मैं
इक
दिन
ऊब
कर
लोगों
से
दुनिया
छोड़
देता
पर,
तेरे
गर्दन
पे
रक्खे
तिल
ने
मुझ
को
थाम
रक्खा
है
Alankrat Srivastava
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फ़लां
ने
कहा
है
फ़लाने
से
हैं
हम
की
हुलिए
से
देखो
दिवाने
से
हैं
हम
हैं
सुनते
नहीं
हम
किसी
आदमी
की
अलग
कुछ
कहाँ
है?
ज़माने
से
हैं
हम
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Alankrat Srivastava
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हूँ
कैसा
आदमी
संकट
में
हँसता
जा
रहा
हूँ
मैं
बुरे
हर
काम
करके
भी
सभी
को
भा
रहा
हूँ
मैं
ज़माने
भर
के
दिल
को
तोड़
के
आया
हूँ
मैं
औ
अब
उन्हीं
के
दुख
को
अपना
दुख
बता
कर
गा
रहा
हूँ
मैं
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Alankrat Srivastava
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