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Alankrat Srivastava
tumhein itnaa jo bhaate hain tumhaare kaan ke jhumke
tumhein itnaa jo bhaate hain tumhaare kaan ke jhumke | तुम्हें इतना जो भाते हैं तुम्हारे कान के झुमके
- Alankrat Srivastava
तुम्हें
इतना
जो
भाते
हैं
तुम्हारे
कान
के
झुमके
चलो
हम
भी
हो
जाते
हैं
तुम्हारे
कान
के
झुमके
बड़ी
शिद्दत
से
हौले
से
तुम्हारे
गाल
सहला
कर
मुझे
अक्सर
जलाते
हैं
तुम्हारे
कान
के
झुमके
अगर
है
चाँद
सी
सूरत
तुम्हारी
तो
सितारों
से
चमन
में
जगमगाते
हैं
तुम्हारे
कान
के
झुमके
- Alankrat Srivastava
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तुझे
भूल
जाने
की
कोशिशें
कभी
कामयाब
न
हो
सकीं
तिरी
याद
शाख़-ए-गुलाब
है
जो
हवा
चली
तो
लचक
गई
Bashir Badr
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जहाँ
सारे
हवा
बनने
की
कोशिश
कर
रहे
थे
वहाँ
भी
हम
दिया
बनने
की
कोशिश
कर
रहे
थे
Abbas Qamar
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वो
शाख़
है
न
फूल,
अगर
तितलियाँ
न
हों
वो
घर
भी
कोई
घर
है
जहाँ
बच्चियाँ
न
हों
Bashir Badr
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नाम
लिख
लिख
के
तिरा
फूल
बनाने
वाला
आज
फिर
शबनमीं
आँखों
से
वरक़
धोता
है
Ghulam Mohammad Qasir
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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रखते
हैं
मोबाइल
में
मोहब्बत
की
निशानी
अब
फूल
किताबों
में
छुपाया
नहीं
करते
Meharban Amrohvi
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
ना
थे
तुम
अगर
फूल
ना
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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नए
दौर
के
नए
ख़्वाब
हैं
नए
मौसमों
के
गुलाब
हैं
ये
मोहब्बतों
के
चराग़
हैं
इन्हें
नफ़रतों
की
हवा
न
दे
Bashir Badr
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ऊपर
उठती
हुई
एक
गर्म
हवा
है
मिरा
दर्द
मेरा
लहजा
कभी
फ़रियाद
नहीं
हो
सकता
Farhat Ehsaas
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जाने
किस
किस
का
ख़याल
आया
है
इस
समुंदर
में
उबाल
आया
है
एक
बच्चा
था
हवा
का
झोंका
साफ़
पानी
को
खंगाल
आया
है
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Dushyant Kumar
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तुम
को
सुन
कर
के
हम
बुदबुदाने
लगे
बेसुरा
ही
सही
गीत
गाने
लगे
Alankrat Srivastava
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गीतों
में
वो
बात
नहीं
थी
मेरी
ये
औका़त
नहीं
थी
Alankrat Srivastava
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है
ग़ज़ल
मेरी
पर
है
तेरे
नाम
पर
ला
के
छोड़ा
मुझे
कैसे
अंजाम
पर
Alankrat Srivastava
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लिखें
तुम
को
क्या
श्याम
की
राधिका
या
वन
वन
जो
भटकी
वो
शिव
साधिका
Alankrat Srivastava
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लिख
रहा
हूँ
मैं
ऐसी
चिट्ठियाँ
मोहब्बत
में
जैसे
मुझको
मिलनी
हों
डिग्रियाँ
मोहब्बत
में
Alankrat Srivastava
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