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Aqib khan
zinda logon se raabta hi nahin
zinda logon se raabta hi nahin | ज़िंदा लोगों से राब्ता ही नहीं
- Aqib khan
ज़िंदा
लोगों
से
राब्ता
ही
नहीं
मुर्दे
आ
आके
बात
करते
हैं
- Aqib khan
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मुझे
ख़ुश
करने
की
कोई
नई
तरकीब
ढूँढो
अब
यूँँ
उसका
ज़िक्र
हर
इक
बात
पर
अच्छा
नहीं
यारों
Harsh saxena
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ख़ुश्बू
की
बरसात
नहीं
कर
पाते
हैं
हम
ख़ुद
ही
शुरुआत
नहीं
कर
पाते
हैं
जिस
लड़की
की
बातें
करते
हैं
सब
सेे
उस
लड़की
से
बात
नहीं
कर
पाते
हैं
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Gyan Prakash Akul
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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मुझे
इक
बात
कहनी
थी
अगर
मुझ
को
इज़ाज़त
हो
तुम्हीं
मेरी
मुहब्बत
हो
मुहब्बत
हो
मुहब्बत
हो
Shadab Asghar
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कुछ
बात
है
कि
हस्ती
मिटती
नहीं
हमारी
सदियों
रहा
है
दुश्मन
दौर-ए-ज़माँ
हमारा
Allama Iqbal
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तुम
मुख़ातिब
भी
हो
क़रीब
भी
हो
तुम
को
देखें
कि
तुम
से
बात
करें
Firaq Gorakhpuri
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जिस
की
बातों
के
फ़साने
लिक्खे
उस
ने
तो
कुछ
न
कहा
था
शायद
Ada Jafarey
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जब
मसअले
न
हल
हो
सकें
बात-चीत
से
फिर
जंग
ही
लड़ो
कि
ज़माना
ख़राब
है
shaan manral
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तुम्हें
ये
किसने
कहा
रब
को
नहीं
मानता
मैं
ये
और
बात
कि
मज़हब
को
नहीं
मानता
मैं
Bhaskar Shukla
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इक
लड़की
से
बात
करो
तो
लगता
है
इस
दुनिया
को
छोड़
के
भी
इक
दुनिया
है
Shadab Asghar
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काश
मेरे
लिए
भी
मर
जाता
मर
के
बर्बाद
करने
वाला
मुझे
Aqib khan
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ख़त्म
क्या
हम
भी
ज़िन्दगी
कर
लें
मन
ये
करता
है
ख़ुद-कुशी
कर
लें
और
ज़्यादा
उलझते
जाते
हैं
जब
भी
सोचा
के
सब
सही
कर
लें
हम
मुहब्बत
लुटाए
जाते
हैं
जो
सियासत
है...
आप
ही
कर
लें
हद
से
ज़्यादा
तो
कुछ
भी
ठीक
नहीं
ख़ुद
में
अब
आपकी
कमी
कर
लें
फिर
न
जाने
के
मैं
मिलूँ
न
मिलूँ
सारे
शिकवे
गिले
अभी
कर
लें
आपसे
इश्क़
तो
नहीं
होना
आप
बस
अपनी
नौकरी
कर
लें
बहर
की
ठन
गई
ख़यालों
से
जब
भी
सोचा
के
शा'इरी
कर
लें
वैसे
दुश्मन
नहीं
तुम्हारा
मैं
ऐसे
ही
मन
था
मुख़्बरी
कर
लें
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Aqib khan
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कहे
देते
हैं
हम
तुम
सेे
हमें
तुम
सेे
नहीं
मतलब
मगर
जो
कह
रहे
हैं
हम
उसे
सच
मत
समझ
लेना
Aqib khan
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बनी
बनाई
ही
ढा
रहा
था
ये
कैसी
दुनिया
बना
रहा
था
बड़ा
सितम
था
कि
दिल
मकाँ
पर
जो
आ
रहा
था
वो
जा
रहा
था
फ़रेब
ओ
धोकों
के
इस
जहाँ
में
निभाने
वाला
निभा
रहा
था
कोई
तो
ढूँढो
कहाँ
गया
वो
वही
जो
अपना
बता
रहा
था
किसी
के
दिल
से
गया
निकाला
किसी
के
रस्ते
में
आ
रहा
था
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Aqib khan
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मेरे
तरकश
में
सारे
तीर
थे
और
वो
मुझ
सेे
क़त्ल
फिर
भी
हो
न
पाया
Aqib khan
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