khatm kya ham bhi zindagi kar len | ख़त्म क्या हम भी ज़िन्दगी कर लें

  - Aqib khan
ख़त्मक्याहमभीज़िन्दगीकरलें
मनयेकरताहैख़ुद-कुशीकरलें
औरज़्यादाउलझतेजातेहैं
जबभीसोचाकेसबसहीकरलें
हममुहब्बतलुटाएजातेहैं
जोसियासतहै...आपहीकरलें
हदसेज़्यादातोकुछभीठीकनहीं
ख़ुदमेंअबआपकीकमीकरलें
फिरजानेकेमैंमिलूँमिलूँ
सारेशिकवेगिलेअभीकरलें
आपसेइश्क़तोनहींहोना
आपबसअपनीनौकरीकरलें
बहरकीठनगईख़यालोंसे
जबभीसोचाकेशा'इरीकरलें
वैसेदुश्मननहींतुम्हारामैं
ऐसेहीमनथामुख़्बरीकरलें
  - Aqib khan
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