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Aqib khan
kitnii aasaan maut maara gaya
kitnii aasaan maut maara gaya | कितनी आसान मौत मारा गया
- Aqib khan
कितनी
आसान
मौत
मारा
गया
वो
जो
ख़ुद
को
ख़ुदा
समझता
था
- Aqib khan
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तुम्हारी
मौत
मेरी
ज़िंदगी
से
बेहतर
है
तुम
एक
बार
मरे
मैं
तो
बार
बार
मरा
Zubair Ali Tabish
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मौत
का
एक
दिन
मुअय्यन
है
नींद
क्यूँँ
रात
भर
नहीं
आती
Mirza Ghalib
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मौत
ही
इंसान
की
दुश्मन
नहीं
ज़िंदगी
भी
जान
ले
कर
जाएगी
Arsh Malsiyani
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तुम्हारे
बाद
अब
मैं
क्या
करूँँगा
गुज़रती
गाड़ियाँ
देखा
करूँँगा
मेरे
मरने
पे
काफ़ी
लोग
होंगे
मैं
अपनी
मौत
पर
ख़र्चा
करूँँगा
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Asif Ali
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दो
गज़
सही
मगर
ये
मेरी
मिल्कियत
तो
है
ऐ
मौत
तूने
मुझे
ज़मींदार
कर
दिया
Rahat Indori
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ऐ
ताइर-ए-लाहूती
उस
रिज़्क़
से
मौत
अच्छी
जिस
रिज़्क़
से
आती
हो
परवाज़
में
कोताही
Allama Iqbal
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जब
से
छेड़ा
है
मेरे
ज़ख़्मों
को
आ
रही
मौत
की
सदा
मुझको
Rachit Sonkar
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हम
चाहते
थे
मौत
ही
हम
को
जुदा
करे
अफ़्सोस
अपना
साथ
वहाँ
तक
नहीं
हुआ
Waseem Nadir
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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यहाँ
मौत
का
ख़ौफ़
कुछ
यूँँ
है
सबको
कि
जीने
की
ख़ातिर
मरे
जा
रहे
हैं
Sapna Moolchandani
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और
क्या
डूबते
की
मंज़िल
है
रात
ही
दिन
ढले
की
मंज़िल
है
ज़ीस्त
जिस
रास्ते
में
पड़ती
है
मौत
उस
रास्ते
की
मंज़िल
है
पहले
इंसान
और
फिर
मज़हब
ये
मेरे
फ़लसफ़े
की
मंज़िल
है
तुझको
बस
ख़ुद
के
ग़म
ही
दिखते
हैं
ये
तेरे
दायरे
की
मंजिल
है
आदमी
ख़ुद
को
भूल
जाता
है
इश्क़
उस
हादसे
की
मंज़िल
है
कैसे
भी
तुक
में
तुक
भिड़ा
डालो
क्या
यही
क़ाफ़िए
की
मंज़िल
है
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Aqib khan
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दिल-ए-विरान
में
कुछ
भी
नज़र
नहीं
आता
तुम्हारे
बाद
यहाँ
सब
धुआँ
धुआँ
सा
है
वो
हर
सवाल
के
बदले
जवाब
चाहता
था
वो
लड़का
जो
कि
तेरी
सम्त
बे-ज़ुबाँ
सा
है
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Aqib khan
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निशानात
होने
ज़रूरी
नहीं
हैं
कई
ज़ख़्म
दिखते
नहीं
पर
हरे
हैं
Aqib khan
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हमको
ख़राब
वक़्त
में
अंदाज़ा
ये
हुआ
कुछ
आदतें
ख़राब
भी
रखनी
ही
चाहिए
Aqib khan
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रहे
साथ
जिसके
उसी
को
छला
है
हैं
जितने
भी
अपने
सभी
को
छला
है
मेरे
साथ
चलने
से
पहले
बताओ
कभी
इस
सेे
पहले
किसी
को
छला
है
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Aqib khan
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