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Aqib khan
hamko kasam se yaar aisi jaankaari thii nahin
hamko kasam se yaar aisi jaankaari thii nahin | हमको क़सम से यार ऐसी जानकारी थी नहीं
- Aqib khan
हमको
क़सम
से
यार
ऐसी
जानकारी
थी
नहीं
कहते
थे
जिसको
जान
वो
लड़की
हमारी
थी
नहीं
- Aqib khan
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अब
वो
तितली
है
न
वो
उम्र
तआ'क़ुब
वाली
मैं
न
कहता
था
बहुत
दूर
न
जाना
मिरे
दोस्त
Faisal Ajmi
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कल
रात
मैं
बहुत
ही
अलग
सा
लगा
मुझे
उसकी
नज़र
ने
यूँँ
मेरी
सूरत
खंगाली
दोस्त
Afzal Ali Afzal
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मकाँ
तो
है
नहीं
जो
खींच
दें
दीवार
इस
दिल
में
कोई
दूजा
नहीं
रह
पाएगा
अब
यार
इस
दिल
में
जहाँ
भर
में
लुटाते
फिर
रहे
है
कम
नहीं
होता
तुम्हारे
वास्ते
इतना
रखा
था
प्यार
इस
दिल
में
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Bhaskar Shukla
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यूँँ
लगे
दोस्त
तिरा
मुझ
से
ख़फ़ा
हो
जाना
जिस
तरह
फूल
से
ख़ुशबू
का
जुदा
हो
जाना
Qateel Shifai
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हम
को
यारों
ने
याद
भी
न
रखा
'जौन'
यारों
के
यार
थे
हम
तो
Jaun Elia
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बस
एक
ही
दोस्त
है
दुनिया
में
अपना
मगर
उस
से
भी
झगड़ा
चल
रहा
है
Zubair Ali Tabish
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लंबा
हिज्र
गुज़ारा
तब
ये
मिलने
के
पल
चार
मिले
जैसे
एक
बड़े
हफ़्ते
में
छोटा
सा
इतवार
मिले
माना
थोड़ा
मुश्किल
है
पर
रोज़
दु'आ
में
माँगा
है
जो
मुझ
सेे
भी
ज़्यादा
चाहे
तुझको
ऐसा
यार
मिले
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Bhaskar Shukla
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एक
आवाज़
कि
जो
मुझको
बचा
लेती
है
ज़िन्दगी
आख़री
लम्हों
में
मना
लेती
है
जिस
पे
मरती
हो
उसे
मुड़
के
नहीं
देखती
वो
और
जिसे
मारना
हो
यार
बना
लेती
है
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Ali Zaryoun
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दोस्ती
और
किसी
ग़रज़
के
लिए
वो
तिजारत
है
दोस्ती
ही
नहीं
Ismail Merathi
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तन्हाई
ये
तंज
करे
है
तन्हा
क्यूँ
है
यार
कहाँ
है
आगे
पीछे
चलने
वाले
Vishal Singh Tabish
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मैं
जाना
चाहता
हूँ
बचपने
में
शुरू
से
सब
शुरू
करना
है
मुझको
Aqib khan
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राहें
अलग
हुईं
हैं
इरादे
अलग
हुए
दौलत
से
इश्क़
के
यूँँ
लबादे
अलग
हुए
इक्कीसवीं
सदी
है
ज़रा
देख
भाल
के
राजा
मरा
है
पहले,
जो
प्यादे
अलग
हुए
पहले
पहल
तनाव
था
जो
बढ़ता
ही
गया
फिर
ज़ार
ज़ार
हो
सभी
वादे
अलग
हुए
कुल
जोड़
कर
के
रह
गए
पेचीदा
पाँच
छह
जब
उनके
आस
पास
से
सादे
अलग
हुए
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Aqib khan
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यूँँ
दिल
से
मेरे
उतर
गए
तुम
नहीं
पता
फिर
किधर
गए
तुम
न
ढूँढों
ख़ुद
को
यूँँ
मेरे
भीतर
यक़ीन
मानो
कि
मर
गए
तुम
तुम्हारा
क्या
है
पुराना
छोड़ा
नए
शजर
पर
ठहर
गए
तुम
तुम्हारे
जैसा
मिले
तुम्हें
और
ख़बर
हो
मुझको
बिखर
गए
तुम
वही
हुनर
अब
सिखाओ
मुझको
वो
जैसे
मुँह
पर
मुकर
गए
तुम
मैं
कितना
झूठा
था
कहता
था
जो
कि
मर
मिटूँगा
अगर
गए
तुम
दिलाओ
जितना
मगर
कभी
भी
यक़ीं
न
होगा
सुधर
गए
तुम
अदा
करो
शुक्रिया
मेरा
अब
थी
मेरी
सोहबत
सँवर
गए
तुम
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Aqib khan
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जीतने
पर
भी
मात
बनती
है
ऐ
ख़ुदा
अब
नजात
बनती
है
बात
करना
बहुत
ज़रूरी
है
बात
करने
से
बात
बनती
है
पहले
महबूब
बनते
हैं
साहब
और
फिर
काइनात
बनती
है
इश्क़
में
लुट
गए,
हाँ
ठीक
हुआ
इश्क़
में
वारदात
बनती
है
तेरी
तस्वीर
बन
तो
जाती
है
पर
बहुत
वाहियात
बनती
है
वो
भी
लौटेगा
देख
लेना
तुम
बाद
दिन
के
ही
रात
बनती
है
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Aqib khan
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मुहब्बत
में
शर्तें
नहीं
चाहिए
चले
जाओ
तुमको
जिधर
जाना
है
Aqib khan
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