tumhaari yaadon ke main aas-paas baitha hooñ | तुम्हारी यादों के मैं आस-पास बैठा हूँ

  - Aqib khan
तुम्हारीयादोंकेमैंआस-पासबैठाहूँ
इसीलिएतोसफ़रमेंउदासबैठाहूँ
जानपाएँगेचेहरेसेजाननेवाले
छिपाएख़ुदमेंहीइकग़म-शनासबैठाहूँ
गलेलगानेकामनथाकिजिसकोवर्षोंसे
वोमिलनेआयाहैतोबद-हवासेबैठाहूँ
येतरबियतमेंनहींहैसोपीनहींसकता
येदोस्तीहैकिपकड़ेगिलासबैठाहूँ
किशाहज़ादीगुलामोंकीतोनहींहोती
मैंजानताहूँमगरलेकेआसबैठाहूँ
  - Aqib khan
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