mas'ala ye hai masaail hi nahin hai koi | मसअला ये है मसाइल ही नहीं है कोई

  - Aqib khan
मसअलायेहैमसाइलहीनहींहैकोई
हालत-ए-हिज्रमेंमुश्किलहीनहींहैकोई
चलतेरहनेकीहोहिम्मततभीतुमआगेबढ़ो
इश्क़कीराहमेंमंज़िलहीनहींहैकोई
साँसेंचलतीहैंमगरआदमीमरजाताहै
सबकोलगताहैकिक़ातिलहीनहींहैकोई
बज़्मकीबातफ़क़तबातभीहोसकतीहै
मतसमझनायहाँजाहिलहीनहींहैकोई
दिलकेहिस्सेमेंमैंपत्थरकोलिएफिरताहूँ
औरदावाहैकेबे-दिलहीनहींहैकोई
  - Aqib khan
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