kyuuñ mujhe kuchh bhi yahaañ achha nahin lagta hai ab | क्यूँ मुझे कुछ भी यहाँ अच्छा नहीं लगता है अब

  - Aqib khan
क्यूँमुझेकुछभीयहाँअच्छानहींलगताहैअब
सचकहूँँतोयेजहाँअच्छानहींलगताहैअब
उम्रभरहमसाथहैंयेतोबोलोमुझसेेतुम
झूठावा'दाजानजाँअच्छानहींलगताहैअब
होअगरकुछकामतोफिरबातभीकरलेंगेहम
इश्क़काचर्चामियाँअच्छानहींलगताहैअब
कुछख़बरअबतकनहींहैजानाहैहमकोकहाँ
चलनाऐसेराएगाँअच्छानहींलगताहैअब
चाँदतारोंकेबराबरबोलाथाइकशख़्सको
सोचमकताआसमाँअच्छानहींलगताहैअब
वक़्तकीहीबातहैजोमेरेपीछेथेकभी
उनकोमेराकारवाँअच्छानहींलगताहैअब
  - Aqib khan
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