ham khoj hi rahe the is zindagi ke saani | हम खोज ही रहे थे इस ज़िंदगी के सानी

  - Akash Rajpoot
हमखोजहीरहेथेइसज़िंदगीकेसानी
इतनेमेंमिलगएतुमबनकरकेज़िंदगानी
छतपरवोगईहैमौसमबदलरहाहै
अबरंगखुलरहाहैहल्कासाआसमानी
दोनोंतरफ़हमारीमुट्ठीभरीहुईहै
इसहाथमेंक़लमहैउसहाथमेंकिसानी
कहतेहैंआजउसनेग़लतीक़ुबूलकीहै
सुनतेहैंआजउसकीआँखेंहुईहैंपानी
माँ-बापकेबुढ़ापेमेंकामग़रआए
किसकामकायेजीवनकिसकामकीजवानी
येइश्क़हैहमाराबिजलीकाबिलनहींहै
हरबारटालतेहोगढ़करनईकहानी
दुनियाग़ज़लहमारीसुनतीरहेगीलेकिन
इकनज़्मआपकोभीफ़ुर्सतमेंहैसुनानी
तोहफ़ेमेंजिसनेमुझकोछल्लाकभीदियाथा
वोइश्क़आख़िरीथावोआख़िरीनिशानी
  - Akash Rajpoot
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy