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Ajay Choubey
peepal ne gher rakkhi hai ghar kii zameen magar
peepal ne gher rakkhi hai ghar kii zameen magar | पीपल ने घेर रक्खी है घर की ज़मीं मगर
- Ajay Choubey
पीपल
ने
घेर
रक्खी
है
घर
की
ज़मीं
मगर
चिड़िया
पसंद
है
मुझे
पीपल
की
डाल
पर
- Ajay Choubey
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मुझे
आँखें
दिखाकर
बोलती
है
चुप
रहो
भैया
बहिन
छोटी
भले
हो
बात
वो
अम्मा
सी
करती
है
Divy Kamaldhwaj
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ख़्वाहिश
सुखाने
रक्खी
थी
कोठे
पे
दोपहर
अब
शाम
हो
चली
मियाँ
देखो
किधर
गई
Adil Mansuri
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ये
जो
दीवार
अँधेरों
ने
उठा
रक्खी
है
मेरा
मक़्सद
इसी
दीवार
में
दर
करना
है
Azm Shakri
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कैसी
बिपता
पाल
रखी
है
क़ुर्बत
की
और
दूरी
की
ख़ुशबू
मार
रही
है
मुझ
को
अपनी
ही
कस्तूरी
की
Naeem Sarmad
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रखी
थी
ले
के
कॉपी
हम
ने
उसकी
ख़ुशी
से
झूम
उठा
बस्ता
हमारा
Ankit Maurya
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वर्षों
की
सब
याद
सजा
के
रक्खी
है
घर
में
बस
सामान
नहीं
है,
समझा
कर
Shivam Tiwari
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हमने
अच्छी
धाँक
जमा
रक्खी
थी
अपनी
फिर
उसने
छोड़ा
और
सब
पानी
कर
डाला
Prashant Sharma Daraz
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बना
रक्खी
हैं
दीवारों
पे
तस्वीरें
परिंदों
की
वगर्ना
हम
तो
अपने
घर
की
वीरानी
से
मर
जाएँ
Afzal Khan
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जो
यहाँ
ख़ुद
ही
लगा
रक्खी
है
चारों
जानिब
एक
दिन
हम
ने
इसी
आग
में
जल
जाना
है
Zafar Iqbal
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आँखें
मैंने
बंद
रखी
हैं
यानी
उनको
देख
रहा
हूँ
Bhaskar Shukla
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डरते
डरते
बता
रहा
हूँ
मैं
ऐसे
रस्ते
पे
जा
रहा
हूँ
मैं
शे'र
अच्छे
नहीं
मैं
कहता
हूँ
आख़िरी
हैं
सुना
रहा
हूँ
मैं
ज़िंदगी
है
कोई
तमाशा
है
अब
तो
पर्दा
गिरा
रहा
हूँ
मैं
थक
गया
हूँ
मैं
मिन्नतें
करके
ख़ामुशी
से
बता
रहा
हूँ
मैं
मौत
पे
प्यार
आ
रहा
है
अब
हँसते
हँसते
बुला
रहा
हूँ
मैं
साहिबा
याद
तुम
मुझे
रखना
उठ
के
महफ़िल
से
जा
रहा
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
थी
मेरी
ग़ज़ल
जैसी
उसको
ही
गुनगुना
रहा
हूँ
मैं
हाँ
अजय
था
ग़ज़ल
का
इक
मक़्ता
उसपे
ताली
बजा
रहा
हूँ
मैं
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Ajay Choubey
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मिले
कुछ
या
कि
ख़ाली
हाथ
रह
जाऊँ
मगर
अब
यार
कुछ
मैं
खो
नहीं
सकता
Ajay Choubey
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जा
चुकी
है,
या
जा
रही
है
अभी
बात
दोनों
में
एक
सी
है
अभी
वो
मुझे
छोड़
के
तो
जाएगी
मेरे
दुख
में
कोई
कमी
है
अभी
मेरे
हालात
मुझ
सेे
मत
पूछो
मेरी
धड़कन
बढ़ी
हुई
है
अभी
याँ
मुझे
कल
का
भी
भरोसा
नहीं
आप
कहते
हैं
ज़िन्दगी
है
अभी
लोग
कहते
हैं
याद
हूँ
मैं
उसे
जो
घड़ी
दी
थी,
चूमती
है
अभी
रात
होने
दे
फिर
मैं
रोऊँगा
मेरे
कमरे
में
रौशनी
है
अभी
मैं
तो
ख़ामोश
हो
गया
कब
का
उसकी
तस्वीर
बोलती
है
अभी
एक
के
जाने
पे
अजय
रो
मत
तेरी
क़िस्मत
में
दूसरी
है
अभी
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Ajay Choubey
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मुहब्बत
से
गले
मिलते
सभी
तो
खेलते
होली
दिलों
से
दिल
अगर
मिलते
कभी
तो
खेलते
होली
सभी
लगते
यहाँ
अपने
मगर
होते
नहीं
अपने
नहीं
गिरगिट
अगर
दिखते
तभी
तो
खेलते
होली
सभी
झूठे
यहाँ
पर
हैं
नहीं
कोई
यहाँ
सच्चा
अगर
सच्चे
हमीं
होते
कभी
तो
खेलते
होली
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Ajay Choubey
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अगर
मैं
देख
लूँ
तुझको
किसी
भी
रात
सपने
में
समझता
हूँ
कि
सपनों
में
लगा
तुम
आग
जाओगी
न
आओ
पास
मेरे
तुम
अकेला
ही
मज़े
में
हूँ
अगर
जाना
मुझे
तुमने
मचलकर
भाग
जाओगी
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Ajay Choubey
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