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Aejaz Bismil
vo shaKHs door tak bhi nazar aa nahin raha
vo shaKHs door tak bhi nazar aa nahin raha | वो शख़्स दूर तक भी नज़र आ नहीं रहा
- Aejaz Bismil
वो
शख़्स
दूर
तक
भी
नज़र
आ
नहीं
रहा
और
मुझको
लौटने
का
हुनर
आ
नहीं
रहा
दुनिया
को
छोड़
कर,
वो
मेरे
पास
लौट
कर
आना
तो
चाहता
है
मगर
आ
नहीं
रहा
मैं
चलना
चाहता
था
मोहब्बत
में
उम्र
भर
मैं
रुकना
चाहता
हूँ
तो
घर
आ
नहीं
रहा
उस
पेड़
का
भी
दुख
है
अजब
जिसकी
शाख
पर
पत्थर
तो
आ
रहे
हैं
समर
आ
नहीं
रहा
- Aejaz Bismil
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वक़्त
अच्छा
भी
आएगा
'नासिर'
ग़म
न
कर
ज़िंदगी
पड़ी
है
अभी
Nasir Kazmi
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जिसकी
ख़ातिर
कितनी
रातें
सुलगाई
जिसके
दुख
में
दिल
जाने
क्यूँ
रोता
है
इक
दिन
हम
सेे
पूछ
रही
थी
वो
लड़की
प्यार
में
कोई
पागल
कैसे
होता
है
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Ritesh Rajwada
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आधी
से
ज़ियादा
शब-ए-ग़म
काट
चुका
हूँ
अब
भी
अगर
आ
जाओ
तो
ये
रात
बड़ी
है
Saqib lakhanavi
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मैं
ज़िन्दगी
में
आज
पहली
बार
घर
नहीं
गया
मगर
तमाम
रात
दिल
से
माँ
का
डर
नहीं
गया
बस
एक
दुख
जो
मेरे
दिल
से
उम्र
भर
न
जाएगा
उसको
किसी
के
साथ
देख
कर
मैं
मर
नहीं
गया
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Tehzeeb Hafi
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अपनी
हालत
का
ख़ुद
एहसास
नहीं
है
मुझ
को
मैं
ने
औरों
से
सुना
है
कि
परेशान
हूँ
मैं
Aasi Uldani
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तू
तो
वाक़िफ़
है
रिवाज़-ए-ग़म
से
इसके
इश्क़
तो
तेरा
भी
ये
पहला
नहीं
है
Siddharth Saaz
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मज़ाक
सहना
नहीं
है
हँसी
नहीं
करनी
उदास
रहने
में
कोई
कमी
नहीं
करनी
Swapnil Tiwari
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तू
भी
कब
मेरे
मुताबिक
मुझे
दुख
दे
पाया
किस
ने
भरना
था
ये
पैमाना
अगर
ख़ाली
था
एक
दुख
ये
कि
तू
मिलने
नहीं
आया
मुझ
सेे
एक
दुख
ये
है
उस
दिन
मेरा
घर
ख़ाली
था
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Tehzeeb Hafi
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तेरे
जाने
से
ज़्यादा
हैं
न
कम
पहले
थे
हम
को
लाहक़
हैं
वही
अब
भी
जो
ग़म
पहले
थे
Afzal Khan
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ये
किस
मक़ाम
पे
लाई
है
ज़िंदगी
हम
को
हँसी
लबों
पे
है
सीने
में
ग़म
का
दफ़्तर
है
Hafeez Banarasi
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मुझे
फ़क़ीर
बना
या
के
बादशाह
बना
प
तेरे
दर
पे
पहुँचने
की
कोई
राह
बना
किसी
के
इश्क़
ने
गुमराह
कर
दिया
है
मुझे
यह
वो
सवाब
है
जो
बाईसे
गुनाह
बना
हजार
ज़ख़्म
लगे
फिर
भी
मुस्कुराता
है
न
जाने
कौन
सी
शय
से
दिल-ए-
तबाह
बना
मेरे
गुनाह
किसी
और
को
पता
ही
न
थे
मेरे
ख़िलाफ़
मेरा
जिस्म
ही
गवाह
बना
मुसाफ़िराने
मोहब्बत
थे
दर
बदर
थे
हम
तेरा
ख़याल
हमारी
पनाह
गाह
बना
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Aejaz Bismil
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इक
ख़ालिश
दिल
के
दरमियाँ
ले
कर
पास
आए
हो
दूरियाँ
ले
कर
हिज्र
इतना
तवील
था
अब
के
चाँद
लौटा
है
झुर्रियाँ
ले
कर
हम
तो
दरया
से
लौट
कर
आए
तिशना
होंटो
पे
पपड़ियाँ
ले
कर
आज
टूटा
वफ़ाओं
का
शीशा
पाँव
लौटे
हैं
किरचियाँ
ले
कर
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तमाशा-ए-मोहब्बत
करके
जाना
हमें
एहले
अज़ीयत
करके
जाना
मेरे
ज़ख़्मों
पे
आँसू,
कहक़हों
में
ज़रा
इसकी
वज़ाहत
करके
जाना
मेरी
दुनिया
से
रुख़सत
होने
वाले
मुझे
दुनिया
से
रुख़सत
करके
जाना
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Aejaz Bismil
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न
जुनूँ
है
न
ही
ललकार
में
दम
है,
ग़म
है
कैसे
हाथों
में
मुहब्बत
का
अलम
है,
ग़म
है
मैं
तो
ये
सोच
के
ख़ुश
था
के
तू
ख़ुश
है,
लेकिन
मेरी
हालत
पे
तेरी
आँख
भी
नम
है,
ग़म
है
इक
ज़माना
है
के
तू
जिसपे
करम
फरमा
है
इक
दिवाना
है
जो
महरूम
ए
सितम
है,
ग़म
है
मुस्कुराना
किसे
अच्छा
नहीं
लगता,
लेकिन
अपनी
तक़दीर
में
जो
चीज़
रक़म
है,
ग़म
है
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Aejaz Bismil
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तुम
मोहब्बत
छोड़
कर
कहती
हो
दुनिया
ठीक
है
देख
लेते
हैं
भला
कब
तक
यह
रस्ता
ठीक
है
आज
भी
उसने
नहीं
पूछा
परिंदे
का
मिज़ाज
आज
भी
उसने
यही
देखा
के
पिंजरा
ठीक
है
तेज़
बारिश,
बिजलियाँ,
तन्हाईयां
और
सर्द
रात
तुम
ही
सोचो
ऐसे
मौसम
में
बिछड़ना
ठीक
है
अब
फ़क़त
उसको
दिलाना
है
मोहब्बत
का
यक़ीं
उसकी
अम्मी
ने
तो
कह
रखखा
है
लड़का
ठीक
है
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Aejaz Bismil
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