ye mulaqaat aakhiri kyun ho | ये मुलाक़ात आख़िरी क्यूँँ हो

  - Aditya Singh aadi
येमुलाक़ातआख़िरीक्यूँँहो
शहर-ए-जानाँसेवापसीक्यूँँहो
एकऔरतकोदेखनेकेलिए
इतनाबैचैनआदमीक्यूँँहो
जिससेेख़तरानहींमुहब्बतका
ऐसीलड़कीसेदोस्तीक्यूँँहो
मैंजोटोकूँतोटोकतीहीनहीं
मैंटोकूँतोटोकतीक्यूँँहो
ख़ूबनोचाहैज़िंदगीनेमुझे
इतनीआसानख़ुद-कुशीक्यूँँहो
हमहैंमालिकउदासचेहरोंके
आइनादेखकरख़ुशीक्यूँँहो
तेरीचौखटपेजबअँधेराहै
मेरेकमरेमेंरौशनीक्यूँँहो
करदिएदफ़्नपैरहनउसके
जोनहींसाँपकेंचुलीक्यूँँहो
जबसलीक़ाहोबजानेका
हाथमोहनकेबाँसुरीक्यूँँहो
जबकोईकामहीनहींमुझसेे
मेरेबारेमेंसोचतीक्यूँँहो
गएपासजबसमुंदरके
फिरकिनारेसेवापसीक्यूँँहो
  - Aditya Singh aadi
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