din ke suraj ko kisi shaam men dhalt dekhooñ | दिन के सूरज को किसी शाम में ढलता देखूँ

  - Aditya Singh aadi
दिनकेसूरजकोकिसीशाममेंढलतादेखूँ
इसबहानेहीसहीचाँदनिकलतादेखूँ
तेरीफ़ितरतहैभलेरंगबदलनालेकिन
मेरीहसरतहैतुझेरंगबदलतादेखूँ
थीमेरेबापकीमेरीभीयहीख़्वाहिशहै
अपनेबेटेकोसहीराहपेचलतादेखूँ
तूचलेग़ैरकीबाहोंकासहारालेकर
मेरीजानिबमैंतेरापैरफिसलतादेखूँ
कूदजाऊँगाकिसीरोज़समुंदरमेंमैं
कबतलकदूरसेपानीकोउबलतादेखूँ
मेरीकमज़ोरनिगाहोंकीयहीइकज़िदहै
तेरेपत्थरसेकलेजेकोपिघलतादेखूँ
येतमन्नाभीतमन्नाहीरहीबचपनसे
घरकीहालतकोकिसीरोज़सँभलतादेखूँ
  - Aditya Singh aadi
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