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Manish
jab KHuda kii do nigaahen ashk se yuñ bhar gaiin
jab KHuda kii do nigaahen ashk se yuñ bhar gaiin | जब ख़ुदा की दो निगाहें अश्क से यूँँ भर गईं
- Manish
जब
ख़ुदा
की
दो
निगाहें
अश्क
से
यूँँ
भर
गईं
सब
दुआएँ
हूर
बन
कर
आसमाँ
सर
कर
गईं
- Manish
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गुज़र
रहा
हूँ
किसी
ख़्वाब
के
इलाक़े
से
ज़मीं
समेटे
हुए
आसमाँ
उठाए
हुए
Aziz Nabeel
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उस
के
चेहरे
की
चमक
के
सामने
सादा
लगा
आसमाँ
पे
चाँद
पूरा
था
मगर
आधा
लगा
Iftikhar Naseem
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अपना
रिश्ता
ज़मीं
से
ही
रक्खो
कुछ
नहीं
आसमान
में
रक्खा
Jaun Elia
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फ़लक
इतना
सूना
है
क्यूँ
ज़मीं
पर
तो
सब
मेरे
थे
Parul Singh "Noor"
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निगाहों
के
तक़ाज़े
चैन
से
मरने
नहीं
देते
यहाँ
मंज़र
ही
ऐसे
हैं
कि
दिल
भरने
नहीं
देते
हमीं
उन
से
उमीदें
आसमाँ
छूने
की
करते
हैं
हमीं
बच्चों
को
अपने
फ़ैसले
करने
नहीं
देते
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Waseem Barelvi
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हम
वो
हैं
जो
नइँ
डरते
वक़्त
के
इम्तिहान
से
वो
परिंदे
और
थे
जो
डर
गए
आसमान
से
Madhav
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ऐ
आ
समाँ
किस
लिए
इस
दर्जा
बरहमी
हम
ने
तो
तिरी
सम्त
इशारा
नहीं
किया
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Ambreen Haseeb Ambar
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धूप
को
साया
ज़मीं
को
आसमाँ
करती
है
माँ
हाथ
रखकर
मेरे
सर
पर
सायबाँ
करती
है
माँ
मेरी
ख़्वाहिश
और
मेरी
ज़िद
उसके
क़दमों
पर
निसार
हाँ
की
गुंज़ाइश
न
हो
तो
फिर
भी
हाँ
करती
है
माँ
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Nawaz Deobandi
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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देख
तो
दिल
कि
जाँ
से
उठता
है
ये
धुआँ
सा
कहाँ
से
उठता
है
गोर
किस
दिलजले
की
है
ये
फ़लक
शोला
इक
सुब्ह
यां
से
उठता
है
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Meer Taqi Meer
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इश्क़
में
लो
चोट
खाना
आ
गया
दर्द
को
दिल
से
मिटाना
आ
गया
सब
दु'आ
माँ
की
हिफ़ाज़त
कर
रही
और
फ़रिश्ता
जी
बचाने
आ
गया
ठोकरों
से
ज़िंदगी
की
सीख
ली
हाथ
दुश्मन
से
मिलाना
आ
गया
प्यार
भी
तो
बंदगी
है
कुछ
नहीं
यह
परस्तिश
भी
निभाना
आ
गया
हमको
उल्फ़त
के
मुबारक
ग़म
सभी
ज़ख़्म
खा
कर
मुस्कुराना
आ
गया
दर्द
का
रिश्ता
है
क्या
इक
दोस्त
से
दोस्त
ग़म
में
यह
बताने
आ
गया
मैं
सुनाऊँ
चल
तुझे
अच्छी
ग़ज़ल
सामने
चेहरा
सुहाना
आ
गया
ज़िंदगी
लो
फिर
मुकम्मल
हो
गई
जब
से
हम
को
ज़ख़्म
खाना
आ
गया
हम
तेरी
जब
से
गली
रहने
लगे
प्यार
का
क़िस्सा
सुनाना
आ
गया
वक़्त
अच्छा
या
बुरा
ही
क्यूँ
न
हो
हम
को
तो
हॅंस
कर
बिताना
आ
गया
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रूह
के
ज़ख़्म
की
सब
दवा
मिल
गई
जब
मोहब्बत
की
तेरे
हवा
मिल
गई
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परस्तिश
नेक
हो
मंदिर
अज़ानों
से
बरसती
हैं
दुआएँ
आसमानों
से
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ग़म
मेरी
ज़िंदगी
की
कहानी
में
है
इस
सबब
से
ग़ज़ल
यह
रवानी
में
है
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प्यार
में
हद
से
मैं
गुज़र
जाता
जिस्म
से
रूह
तक
उतर
जाता
देखते
जो
मेरी
निगाहों
में
इश्क़
का
तुम
में
भी
असर
जाता
है
वफ़ा
में
मेरी
बहुत
शिद्दत
कहते
तुम
प्यार
से
तो
मर
जाता
टूट
जाता
अगर
ये
दिल
मेरा
काँच
के
जैसे
मैं
बिखर
जाता
बे-वफ़ाई
का
ग़म
मेरा
देखा
सुन
सदाऍं
ख़ुदा
उतर
जाता
है
उदासी
सी
ज़िंदगी
अपनी
देख
कर
मैं
तुझे
निखर
जाता
दे
रही
है
हवा
पता
तेरा
खोजने
तुझको
मैं
जिधर
जाता
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Manish
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