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Abha sethi
surkh har zarra haya se jabse thehra
surkh har zarra haya se jabse thehra | सुर्ख़ हर ज़र्रा हया से जबसे ठहरा
- Abha sethi
सुर्ख़
हर
ज़र्रा
हया
से
जबसे
ठहरा
बनके
शबनम
लम्स
तेरा
वो
बदन
पे
- Abha sethi
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सभी
से
राज़
कह
देता
हूँ
अपने
न
जाने
क्या
छुपाना
चाहता
हूँ
Shariq Kaifi
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हम
पे
एहसान
हैं
उदासी
के
मुस्कुराएँ
तो
शर्म
आती
है
Varun Anand
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ये
गहरा
राज़
है
इसका
बदन
को
खा
ही
जाती
है
मोहब्बत
पाक
होकर
भी
हवस
तक
आ
ही
जाती
है
ALI ZUHRI
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वो
अपने
चेहरे
में
सौ
आफ़ताब
रखते
हैं
इसीलिए
तो
वो
रुख़
पे
नक़ाब
रखते
हैं
Hasrat Jaipuri
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किसी
के
झूठ
से
पर्दा
हटाकर
हमारा
सच
बहुत
रोया
था
उस
दिन
Shadab Asghar
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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रुख़्सार
पर
है
रंग-ए-हया
का
फ़रोग़
आज
बोसे
का
नाम
मैं
ने
लिया
वो
निखर
गए
Hakim Mohammad Ajmal Khan Shaida
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फ़र्क़
इतना
है
कि
तू
पर्दे
में
और
मैं
बे-हिजाब
वर्ना
मैं
अक्स-ए-मुकम्मल
हूँ
तिरी
तस्वीर
का
Asad Bhopali
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तू
इस
तरह
से
मिला
फिर
मलाल
भी
न
रहा
तेरे
ख़याल
में
अपना
ख़याल
भी
न
रहा
कुछ
इस
अदास
झुकी
थी
हया
से
आँख
तेरी
हमारी
आँख
में
कोई
सवाल
भी
न
रहा
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Subhan Asad
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तशक्कुर
बे-वफ़ाई
का
सनम
तेरी
लगे
पढ़ने
हमें
अब
तुम
भी
शिद्दत
से
Abha sethi
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कहते
नहीं
दर्द-ए-दिल
हम
को
भी
सताता
है
ज़हमत
का
तमाशा
तो
सब
को
नहीं
आता
है
Abha sethi
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यूँँ
तो
है
दफ़्तर
में
काम
बहुत
फिर
भी
निकाल
लेते
वक़्त
तसव्वुर
का
तेरे
Abha sethi
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नहीं
करता
तिरा
भी
दिल
कभी
तू
हँस
ज़रा
घुल-मिल
Abha sethi
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ज़रूरत
नहीं
इत्र
की
अब
हमें
ख़यालो
से
तेरे
महक
हम
गए
Abha sethi
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