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Abha sethi
bikhre chehre kii aabha bhi har soo
bikhre chehre kii aabha bhi har soo | बिखरे चेहरे की आभा भी हर सू
- Abha sethi
बिखरे
चेहरे
की
आभा
भी
हर
सू
हो
मसर्रत
न
कोई
रोना
हो
- Abha sethi
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किनारे
दो
मिलाने
में
हैं
कितनी
मुश्किलें
सोचो
ये
पुल
दिन
भर
ही
सीने
पे
बिचारा
चोट
खाता
है
Prashant Beybaar
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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मैं
पा
सका
न
कभी
इस
ख़लिश
से
छुटकारा
वो
मुझ
से
जीत
भी
सकता
था
जाने
क्यूँँ
हारा
Javed Akhtar
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मुझ
को
बीमार
करेगी
तिरी
आदत
इक
दिन
और
फिर
तुझ
से
भी
अच्छा
नहीं
हो
पाऊँगा
Rahul Jha
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उतर
कर
आसमानों
से
ज़मीं
की
ख़ाक
पर
बैठो
ख़ुदा
ने
सब
सेे
ऊँची
आपको
मसनद
अता
की
है
Pawan mahabodhi
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तुम
भी
लिखना
तुम
ने
उस
शब
कितनी
बार
पिया
पानी
तुम
ने
भी
तो
छज्जे
ऊपर
देखा
होगा
पूरा
चाँद
Nida Fazli
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भेज
देता
हूँ
मगर
पहले
बता
दूँ
तुझ
को
मुझ
से
मिलता
नहीं
कोई
मिरी
तस्वीर
के
बाद
Umair Najmi
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इस
का
अपनी
ही
रवानी
पर
नहीं
है
इख़्तियार
ज़िंदगी
शिव
की
जटाओं
में
है
गंगा
की
तरह
Ayush Charagh
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किसी
से
छोटी
सी
एक
उम्मीद
बाँध
लीजिए
मोहब्बतों
का
अगर
जनाज़ा
निकालना
है
Shakeel Jamali
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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वतन
महबूब
अपना,
इश्क़
शिद्दत
से
निभाते
हम
मुकर्रर
इक
न
दिन
है
इश्क़
हर
लम्हा
जताते
हम
हैं
था
में
हाथ
रखते
जान
भी
क़ुर्बान
उस
पर
ही
लिपट
आँचल
तिरंगे
में
फ़ना
उसके
हो
जाते
हम
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Abha sethi
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पल
पल
खनकती
बातें
करती
है
लगे
जैसे
के
हो
चंचल
सी
बातूनी
सखी
पाज़ेब
ये
जी
आपकी
Abha sethi
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खोए
इक
दूजे
में
रहे
हम
तुम
होता
हो
फिर
हो
जो
भी
होना
हो
Abha sethi
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हो
न
कोई
रज़्म
कोई
भी
वबा
कोई
न
ज़हमत
है
दु'आ
इस
साल
रब
हिस्से
हो
सबके
तेरी
रहमत
Abha sethi
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हर
शख़्स
के
बस
का
नहीं
ग़म
को
छिपाना
ख़ूबी
है
Abha sethi
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