apni hasti ko khaaq karta hai | अपनी हस्ती को खाक़ करता है

  - Abdullah Nishaat
अपनीहस्तीकोखाक़करताहै
राएगानीकादमजोभरताहै
नाउम्मीदीसेभरचुकाहोगा
जोउम्मीदोंमेंरंगभरताहै
लाज़मीहैसमेटलेख़ुदको
तंगगलियोंसेजोगुज़रताहै
तेराकिरदारमारनाहोगा
येकहानीख़राबकरताहै
नागकहतेहोतुममुनाफ़िक़को
परमुनाफ़िक़सेनागडरताहै
लोगउसकोनिशातकहतेहैं
तंज़करनेसेजोनिखरताहै
  - Abdullah Nishaat
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