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ATUL SINGH
mile hain zakhm itne ki bataa bhi main nahin saka
mile hain zakhm itne ki bataa bhi main nahin saka | मिले हैं ज़ख़्म इतने कि बता भी मैं नहीं सकता
- ATUL SINGH
मिले
हैं
ज़ख़्म
इतने
कि
बता
भी
मैं
नहीं
सकता
किसी
से
बाद
तेरे
दिल
लगा
भी
मैं
नहीं
सकता
- ATUL SINGH
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आज
है
उनको
आना,
मज़ा
आएगा
फिर
जलेगा
ज़माना,
मज़ा
आएगा
तीर
उनकी
नज़र
के
चलेंगे
कई
दिल
बनेगा
निशाना
मज़ा
आएगा
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Bhaskar Shukla
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तीर
खाने
की
हवस
है
तो
जिगर
पैदा
कर
सरफ़रोशी
की
तमन्ना
है
तो
सर
पैदा
कर
Ameer Minai
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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देखा
जो
खा
के
तीर
कमीं-गाह
की
तरफ़
अपने
ही
दोस्तों
से
मुलाक़ात
हो
गई
Hafeez Jalandhari
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तेरे
लगाए
हुए
ज़ख़्म
क्यूँँ
नहीं
भरते
मेरे
लगाए
हुए
पेड़
सूख
जाते
हैं
Tehzeeb Hafi
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सब
परिंदों
से
प्यार
लूँगा
मैं
पेड़
का
रूप
धार
लूँगा
मैं
तू
निशाने
पे
आ
भी
जाए
अगर
कौन
सा
तीर
मार
लूँगा
मैं
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Tehzeeb Hafi
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सहर
की
आस
लगाए
हुए
हैं
वो
कि
जिन्हें
कमान-ए-शब
से
चले
तीर
की
ख़बर
भी
नहीं
Abhishek shukla
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तुम्हारी
याद
के
जब
ज़ख़्म
भरने
लगते
हैं
किसी
बहाने
तुम्हें
याद
करने
लगते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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जो
सारे
ज़ख़्म
मेरे
भर
दिया
करता
उसी
के
नाम
का
ख़ंजर
बनाया
है
Parul Singh "Noor"
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तीर
पर
तीर
लगाओ
तुम्हें
डर
किस
का
है
सीना
किस
का
है
मिरी
जान
जिगर
किस
का
है
Ameer Minai
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वो
अगर
इतना
बुरा
ही
है
अतुल
छोड़
तो
फिर
क्यूँ
नहीं
देते
उसे
बस
तुम्हारे
प्यार
का
है
रिश्ता
वो
तोड़
तो
फिर
क्यूँ
नहीं
देते
उसे
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ATUL SINGH
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तुम
धरा
पर
बैठ
कर
सपने
गगन
के
पालते
हो
है
विजय
की
चाह
तो
क्यूँ
काम
कल
पर
टालते
हो
और
अंदाज़ा
नदी
का
छोर
पर
मिलता
नहीं
है
कूद
कर
देखो
न
डर
क्यूँ
डूबने
का
पालते
हो
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ATUL SINGH
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हम
ऐसा
इश्क़
करने
जा
रहे
हैं
जिसे
करके
सभी
पछता
रहे
हैं
हमीं
हैं
जो
कि
सबको
जानते
थे
हमीं
अब
सब
सेे
धोखा
खा
रहे
हैं
वफ़ा
के
वादे
वो
करती
है
हरदम
सो
सारे
वादे
हम
लिखवा
रहे
हैं
क़रीब
इतने
हैं
कैसे
लें
न
बोसा
सितम
ये
है
कि
वो
शर्मा
रहे
हैं
कहाँ
फ़ुर्सत
उन्हें
हमको
मनाएँ
हम
अपने
दिल
को
ख़ुद
समझा
रहे
हैं
यही
हर
बार
का
जुमला
है
उसका
सुनो
माँ
घर
पे
है
हम
जा
रहे
हैं
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ATUL SINGH
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चलो
फिर
से
मिलें
हम
अजनबी
बनकर
चलो
फिर
से
वफ़ा
की
क़स
में
हम
खाएँ
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ATUL SINGH
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आप
जो
कुछ
भी
कहे
मुझ
से
वो
सब
कुछ
ही
सही
है
इश्क़
भोला
है
मेरा
इतना,
मगर
अंधा
नहीं
है
ATUL SINGH
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