bayaañ karte bahut socha hua sa kuchh | बयाँ करते बहुत सोचा हुआ सा कुछ

  - kapil verma
बयाँकरतेबहुतसोचाहुआसाकुछ
मगरबसरहगयाउलझाहुआसाकुछ
अभीहीदिलकीअलमारीसमेटीहै
मिलेगाकलयहाँबिखराहुआसाकुछ
हयातीमेंहयातीथीतिरेहोते
बचाहैअबतोबसथोपाहुआसाकुछ
घनाजंगलदबाकंक्रीटकेनीचे
खिलेफिरभीवहाँमहकाहुआसाकुछ
सिवामेरेमुझेथाऔरक्याहासिल
परअबहैरूहमेंपनपाहुआसाकुछ
ग़ुरूर-ए-हुस्नकामस्कनरहेदोदिन
बक़ायादिनहैबसउजड़ाहुआसाकुछ
यतीमोंमेंहुनरयेक़ाबिल-ए-तारीफ़
किख़ुदमेंवोरखेंपालाहुआसाकुछ
लड़कपनमेंबिलखनाभीमुनासिबथा
ग़ज़लमेंअबरखूँसहमाहुआसाकुछ
  - kapil verma
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