ye fitna kursi kii khaatir macha raha hai koii | ये फ़ित्ना कुर्सी की ख़ातिर मचा रहा है कोई

  - riyaz aasi
येफ़ित्नाकुर्सीकीख़ातिरमचारहाहैकोई
दिलोंमेंआतिश-ए-नफ़रतलगारहाहैकोई
तुम्हारीआँखसेयूँँहीनहींउड़ीनींदें
तुम्हारीयादमेंआँसूबहारहाहैकोई
चमनमेंआएतोहमपरयेराज़खुलहीगया
तुम्हारेजिस्मकीख़ुशबूचुरारहाहैकोई
तुम्हारेचेहरेकीउलझनबतारहीहैहमें
तुम्हेंभीप्यारमेंशायदसतारहाहैकोई
गरेबाँचाकहोजाएअबसँभलआसी
तड़पकेबज़्ममेंग़ज़लेंसुनारहाहैकोई
  - riyaz aasi
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