tu zaKHm dil ko mere be-shumaar deta hai | तू ज़ख़्म दिल को मेरे बे-शुमार देता है

  - riyaz aasi
तूज़ख़्मदिलकोमेरेबे-शुमारदेताहै
मेरीग़ज़लकोतेराग़मनिखारदेताहै
तेरीगलीसेगुज़रताहूँइसलिएहमदम
तेरीगलीसेगुज़रनाभीप्यारदेताहै
वोफेरकरमेरेबालोंमेंउँगलियाँअपनी
बलाएँसारीमेरीफिरउतारदेताहै
रक़ीबछेड़केबातेंकभीकभीतेरी
पुरानेज़ख़्मकोमेरेउभारदेताहै
मुसीबतोंमेंदिल-ए-बे-क़रारकोआसी
ख़याल-ए-यारहीअक्सरक़रारदेताहै
  - riyaz aasi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy