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100rav
tire fareb men khayal likhti hai meri qalam
tire fareb men khayal likhti hai meri qalam | तिरे फ़रेब में ख़याल लिखती है मेरी क़लम
- 100rav
तिरे
फ़रेब
में
ख़याल
लिखती
है
मेरी
क़लम
ग़ज़ल-सरा
बना
ही
होगा
यार
वो
तेरा
मियाँ
- 100rav
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मैं
इस
ख़याल
से
शर्मिंदगी
में
डूब
गया
कि
मेरे
होते
हुए
वो
नदी
में
डूब
गया
Siraj Faisal Khan
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पहले
ख़याल
रख
मिरा
मेहमान
कर
मुझे
फिर
अपनी
कोई
चाल
से
हैरान
कर
मुझे
हैं
कौन
आप,
याद
नहीं,कब
मिले
थे
हम
इतना
भी
ख़ुश
न
होइए
पहचान
कर
मुझे
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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बदनज़र
उठने
ही
वाली
थी
किसी
की
जानिब
अपने
बेटी
का
ख़याल
आया
तो
दिल
काँप
गया
Nawaz Deobandi
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मैं
चाहता
यही
था
सब
चाह
ख़त्म
हो
अब
फिर
चाहकर
तुम्हें
बदला
ये
ख़याल
मेरा
Abhay Aadiv
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धोखा
है
इक
फ़रेब
है
मंज़िल
का
हर
ख़याल
सच
पूछिए
तो
सारा
सफ़र
वापसी
का
है
Rajesh Reddy
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मेरा
ख़याल
तेरी
चुप्पियों
को
आता
है
तेरा
ख़याल
मेरी
हिचकियों
को
आता
है
Kumar Vishwas
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ख़याल
में
भी
उसे
बे-रिदा
नहीं
किया
है
ये
ज़ुल्म
मुझ
सेे
नहीं
हो
सका
नहीं
किया
है
Ali Zaryoun
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चला
था
ज़िक्र
ज़माने
की
बे-वफ़ाई
का
सो
आ
गया
है
तुम्हारा
ख़याल
वैसे
ही
Ahmad Faraz
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मैं
क्या
बताऊँ
वो
कितना
क़रीब
है
मेरे
मेरा
ख़याल
भी
उसको
सुनाई
देता
है
वो
जिसने
आँख
अता
की
है
देखने
के
लिए
उसी
को
छोड़
के
सब
कुछ
दिखाई
देता
है
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Zubair Ali Tabish
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गो
मैं
रहा
रहीन-ए-सितम-हा-ए-रोज़गार
लेकिन
तिरे
ख़याल
से
ग़ाफ़िल
नहीं
रहा
Mirza Ghalib
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मेरे
पीछे
हाथ
रख
के
कामयाब
कर
दे
बस
ऐसी
एक
लड़की
की
तलाश
कर
रहा
हूँ
मैं
100rav
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नहीं
रोया
गया
बस
इसलिए
मुझ
सेे
कि
मज़दूरों
के
अपने
घर
नहीं
होते
100rav
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किसी
की
चाह
में
गया
मैं
कृष्ण
की
शरण
में
फिर
शरण
में
कृष्ण
की
किसी
की
चाह
ही
नहीं
रही
100rav
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इसलिए
भी
शांत
रहता
हूँ
मैं
अब
देर
से
ही
पर
वो
करता
है
हिसाब
100rav
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ख़ुद
को
हरदम
सही
समझती
है
हँसने
को
फिर
हँसी
समझती
है
लिखता
हूँ
बात
दिल
की
मैं
और
वो
बात
को
शा'इरी
समझती
है
दरिया
पे
बस
पियासा
आता
है
वो
मुझे
बस
वही
समझती
है
डूब
कर
आशिक़ी
बताऊँगा
इश्क़
की
आशिक़ी
समझती
है
ज़िंदगी
मैं
जिसे
समझता
हूँ
ग़ैर
को
ज़िंदगी
समझती
है
मैं
दिखूँ
तो
चिपकती
है
उसको
वो
मुझे
छिपकली
समझती
है
कहने
को
दोस्त
हूँ
ना
मैं
तेरा
सच
बता
दोस्ती
समझती
है
हाल
मत
पूछना
तू
सौरभ
का
जीते
जी
ख़ुद-कुशी
समझती
है
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100rav
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