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100rav
kaamgaari naaz itnaa laati hai phir
kaamgaari naaz itnaa laati hai phir | कामगारी नाज़ इतना लाती है फिर
- 100rav
कामगारी
नाज़
इतना
लाती
है
फिर
वो
बटन
ˈफ़ॉलो
का
दबता
ही
नहीं
है
- 100rav
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इक
ये
भी
तो
अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ
है
ऐ
चारागरो
दर्द
बढ़ा
क्यूँँ
नहीं
देते
Ahmad Faraz
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नाज़
क्या
इस
पे
जो
बदला
है
ज़माने
ने
तुम्हें
मर्द
हैं
वो
जो
ज़माने
को
बदल
देते
हैं
Akbar Allahabadi
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मिलता
नहीं
जहाँ
में
कोई
काम
ढंग
का
इक
इश्क़
था
सो
वो
भी
कई
बार
कर
चुके
Nomaan Shauque
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वफ़ा
तुम
से
करेंगे
दुख
सहेंगे
नाज़
उठाएँगे
जिसे
आता
है
दिल
देना
उसे
हर
काम
आता
है
Arzoo Lakhnavi
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आफ़त
तो
है
वो
नाज़
भी
अंदाज़
भी
लेकिन
मरता
हूँ
मैं
जिस
पर
वो
अदा
और
ही
कुछ
है
Ameer Minai
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तेरी
निगाह-ए-नाज़
से
छूटे
हुए
दरख़्त
मर
जाएँ
क्या
करें
बता
सूखे
हुए
दरख़्त
हैरत
है
पेड़
नीम
के
देने
लगे
हैं
आम
पगला
गए
हैं
आपके
चू
में
हुए
दरख़्त
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Varun Anand
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अजब
अंदाज़
के
शाम-ओ-सहर
हैं
कोई
तस्वीर
हो
जैसे
अधूरी
Asad Bhopali
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यही
सोच
कर
ख़ुद
पे
हम
नाज़
करते
कि
हम
उनकी
पहली
मुहब्बत
रहे
हैं
Harsh saxena
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जलता
नहीं
हूँ
आतिश-ए-रुख़सार
देख
कर
करता
हूँ
नाज़
ताक़त-ए-दीदार
देख
कर
Shaikh Sohail
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फ़िक्र-ए-ईजाद
में
गुम
हूँ
मुझे
ग़ाफ़िल
न
समझ
अपने
अंदाज़
पर
ईजाद
करूँँगा
तुझ
को
Jaun Elia
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कभी
पीछे
नहीं
मुड़ता
मगर
हाँ
पुकारो
तुम
तो
बाएँ
मुड़
लूँ
दो
बार
100rav
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शहर
में
गुनाह
घर
बनाता
ही
नहीं
अगर
काटने
लगे
सज़ा
बशर
जो
संविधान
से
100rav
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मैं
जहन्नम
भी
ख़ुशी
से
काट
लूँगा
हाँ
ग़ज़ल
यूट्यूब
पे
हाफ़ी
की
हो
बस
100rav
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क़लम
ने
कल
छुआ
था
कोरे
काग़ज़
को
कई
दिन
शा'इरी
महकेगी
मुझ
सेे
अब
100rav
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कभी
पूछना
मत
किसे
चाहते
हैं
पता
है
तुझे
हम
तुझे
चाहते
हैं
बुराई
जो
करते
हैं
उसकी
हाँ
मुझ
सेे
ख़बर
है
ये
भी
बस
उसे
चाहते
हैं
न
मुझ
सेे
तू
मिलना
हाँ
घर
पे
ही
रहना
नहीं
तेरे
'आशिक़
नये
चाहते
हैं
हाँ
जाना
है
जा
जीने
की
वज्ह
तो
दे
कभी
तुझ
सेे
लगना
गले
चाहते
हैं
ख़ुदा
मौत
देना
तू
उसके
ही
जाते
ये
यादें
न
उसको
चुभे
चाहते
हैं
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100rav
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