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100rav
gawaahi den agar mere ye takie
gawaahi den agar mere ye takie | गवाही दें अगर मेरे ये तकिए
- 100rav
गवाही
दें
अगर
मेरे
ये
तकिए
तुम्हें
भी
यार
शायद
जेल
होती
- 100rav
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है
अब
भी
बिस्तर-ए-जाँ
पर
तिरे
बदन
की
शिकन
मैं
ख़ुद
ही
मिटने
लगा
हूँ
उसे
मिटाते
हुए
Azhar Iqbal
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हुस्न
सब
को
ख़ुदा
नहीं
देता
हर
किसी
की
नज़र
नहीं
होती
Ibn E Insha
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हर
गीत
में
हर
बार
गाऊँगा
तुझे
अपनी
ग़ज़ल
में
गुनगुनाऊँगा
तुझे
तू
ईद
है
और
तू
ही
दीवाली
मेरी
मैं
हर
बरस
यूँँही
मनाऊँगा
तुझे
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Krishnakant Kabk
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ग़ज़ल
पूरी
न
हो
चाहे,
मग़र
इतनी
सी
ख़्वाहिश
है
मुझे
इक
शे'र
कहना
है
तेरे
रुख़्सार
की
ख़ातिर
Siddharth Saaz
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मिलने
की
तरह
मुझ
सेे
वो
पल
भर
नहीं
मिलता
दिल
उस
से
मिला
जिस
सेे
मुक़द्दर
नहीं
मिलता
Naseer Turabi
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उस
ने
फेंका
मुझ
पे
पत्थर
और
मैं
पानी
की
तरह
और
ऊँचा
और
ऊँचा
और
ऊँचा
हो
गया
Kunwar Bechain
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तमाम
फ़र्क़
मोहब्बत
में
एक
बात
के
हैं
वो
अपनी
ज़ात
का
नईं
है
हम
उस
की
ज़ात
के
हैं
Pallav Mishra
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फिजूलखर्ची
नहीं
करेंगे
हमारे
चंद
अच्छे
दोस्तों
ने
ये
वा'दा
ख़ुद
से
किया
हुआ
है
कि
शक्ल
अल्लाह
ने
अच्छी
दी
है
सो
बातें
अच्छी
नहीं
करेंगे
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Rehman Faris
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उस
ने
सारी
दुनिया
माँगी
मैंने
उस
को
माँगा
है
उस
के
सपने
एक
तरफ़
हैं
मेरा
सपना
एक
तरफ़
Varun Anand
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अगर
मैं
कथा
का
क़लमकार
होता
यक़ीनन
ही
वो
तो
मिरा
यार
होता
लगाती
नहीं
हर
दफ़ा
वो
बहाने
लगा
लेती
सीने
से
गर
प्यार
होता
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Vijay Potter Singhadiya
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हाँ
बीच
बीच
में
लिखूँगा
शे'र
कुछ
नए
नए
कहीं
तुम्हें
यक़ीं
न
हो
चले
कि
तुमपे
लिखता
हूँ
100rav
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कहा
मैंने
पता
है
किस
तरह
बर्बाद
करते
हो,
लगा
दी
आग
उसने
कोरे
काग़ज़
में
सलाई
से
100rav
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हाँ
रोता
देख
मुझको
पूछते
हैं
सब
तेरा
ही
नाम
तुझे
भी
लोग
हँसता
देख
कुछ
तो
पूछते
होंगे
100rav
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गाँव
में
दिए
हैं
जलते
और
रौशनी
भी
है,
लाइटें
हैं
शहर
में
तो
फिर
अँधेरा
कैसा
है
100rav
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ख़ुद
को
हरदम
सही
समझती
है
हँसने
को
फिर
हँसी
समझती
है
लिखता
हूँ
बात
दिल
की
मैं
और
वो
बात
को
शा'इरी
समझती
है
दरिया
पे
बस
पियासा
आता
है
वो
मुझे
बस
वही
समझती
है
डूब
कर
आशिक़ी
बताऊँगा
इश्क़
की
आशिक़ी
समझती
है
ज़िंदगी
मैं
जिसे
समझता
हूँ
ग़ैर
को
ज़िंदगी
समझती
है
मैं
दिखूँ
तो
चिपकती
है
उसको
वो
मुझे
छिपकली
समझती
है
कहने
को
दोस्त
हूँ
ना
मैं
तेरा
सच
बता
दोस्ती
समझती
है
हाल
मत
पूछना
तू
सौरभ
का
जीते
जी
ख़ुद-कुशी
समझती
है
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100rav
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