jagah nafrat banaa letii hai kaise bhi muhabbat men | जगह नफ़रत बना लेती है कैसे भी मुहब्बत में,

  - 100rav
जगहनफ़रतबनालेतीहैकैसेभीमुहब्बतमें,
बड़ेदिनतकरखोतोकीड़ेपड़जातेहैंशरबतमें,
बरसपहलेगईथीऔरबच्चाइकमहीनेका,
मेरातोदिललगाहैआजभीख़ुदकीमरम्मतमें,
ख़ुदामानानमाज़ीहैमियाँउसकामगरफिरभी,
सुनाथाहूरमिलतीहैअजलकेबादजन्नतमें,
किसीकोहुस्नयातोअक्लदेताहैवोउजलतमें,
इन्हींबसबे-वफ़ाओंकोबनाताक्यूँहैफ़ुर्सतमें,
हाँजबअंगूरकोतरबूज़लिखसकताहैइकशाइर,
ग़लत-फ़हमीहैलोगोंकोलिखाहोगायेनफ़रतमें
  - 100rav
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