raaste jo bhi chamak-daar nazar aate hain | रास्ते जो भी चमक-दार नज़र आते हैं

  - Zubair Ali Tabish
रास्तेजोभीचमक-दारनज़रआतेहैं
सबतेरीओढ़नीकेतारनज़रआतेहैं
कोईपागलहीमोहब्बतसेनवाज़ेगामुझे
आपतोख़ैरसमझदारनज़रआतेहैं
मैंकहाँजाऊँकरूँँकिससेशिकायतउसकी
हरतरफ़उसकेतरफ़-दारनज़रआतेहैं
ज़ख़्मभरनेलगेहैंपिछलीमुलाक़ातोंके
फिरमुलाक़ातकेआसारनज़रआतेहैं
एकहीबारनज़रपड़तीहैउनपर'ताबिश'
औरफिरवोहीलगातारनज़रआतेहैं
  - Zubair Ali Tabish
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