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Zia Mazkoor
chaaragar ai chaaragar chillaati thii
chaaragar ai chaaragar chillaati thii | चारा-गर ऐ चारा-गर चिल्लाती थी
- Zia Mazkoor
चारा-गर
ऐ
चारा-गर
चिल्लाती
थी
ज़ख़्मों
को
भी
हाथ
नहीं
लगवाती
थी
पता
नहीं
कैसा
माहौल
था
उसके
घर
बुर्का
पहन
के
शर्टें
लेने
आती
थी
- Zia Mazkoor
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पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
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Tanoj Dadhich
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रोज़
ढक
लेती
थी
नीला
जिस्म
अपना
शुक्र
है
आ
गई
बाहर
घर
की
बातें
Parul Singh "Noor"
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अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
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अभी
ज़िंदा
है
माँ
मेरी
मुझे
कुछ
भी
नहीं
होगा
मैं
घर
से
जब
निकलता
हूँ
दु'आ
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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सारी
हिम्मत
टूट
गई,
बच्चों
से
ये
सुनकर
अब
भूखे
पेट
गुज़ारा
करने
की
हिम्मत
है
फूँका
घर,
भूखे
बच्चे,
टूटी
उम्मीदें,
अब
मुझ
में,
रस्सी
को
फंदा
करने
की
हिम्मत
है
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Aman G Mishra
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जिसे
तुम
काट
आए
उस
शजर
को
ढूँढता
होगा
परिंदा
लौटकर
के
अपने
घर
को
ढूँढता
होगा
Bhaskar Shukla
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हमारे
घर
के
रिश्तों
में
अभी
बारीकियाँ
कम
हैं
भतीजा
मार
खाता
है
तो
चाचा
बोल
देते
हैं
Nirbhay Nishchhal
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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उन
के
होने
से
बख़्त
होते
हैं
बाप
घर
के
दरख़्त
होते
हैं
Unknown
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कहाँ
रोते
उसे
शादी
के
घर
में
सो
इक
सूनी
सड़क
पर
आ
गए
हम
Shariq Kaifi
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वक़्त
ही
कम
था
फ़ैसले
के
लिए
वर्ना
मैं
आता
मशवरे
के
लिए
Zia Mazkoor
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ऐसे
उस
हाथ
से
गिरे
हम
लोग
टूटते
टूटते
बचे
हम
लोग
अपना
क़िस्सा
सुना
रहा
है
कोई
और
दीवार
के
बने
हम
लोग
वस्ल
के
भेद
खोलती
मिट्टी
चादरें
झाड़ते
हुए
हम
लोग
उस
कबूतर
ने
अपनी
मर्ज़ी
की
सीटियाँ
मारते
रहे
हम
लोग
पूछने
पर
कोई
नहीं
बोला
कैसे
दरवाज़ा
खोलते
हम
लोग
हाफ़िज़े
के
लिए
दवा
खाई
और
भी
भूलने
लगे
हम
लोग
ऐन
मुमकिन
था
लौट
आता
वो
उस
के
पीछे
नहीं
गए
हम
लोग
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Zia Mazkoor
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एक
नज़र
देखते
तो
जाओ
मुझे
कब
कहा
है
गले
लगाओ
मुझे
तुमको
नुस्खा
भी
लिख
के
दे
दूँगा
ज़ख़्म
तो
ठीक
से
दिखाओ
मुझे
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Zia Mazkoor
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क्या
तुम
तब
भी
ऐसे
ही
चुपचाप
तमाशा
देखोगे
इस
मुश्किल
में
फँसने
वाली
अगर
तुम्हारी
बेटी
हो
Zia Mazkoor
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वक़्त
ही
कम
था
फ़ैसले
के
लिए
वर्ना
मैं
आता
मशवरे
के
लिए
तुम
को
अच्छे
लगे
तो
तुम
रख
लो
फूल
तोड़े
थे
बेचने
के
लिए
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Zia Mazkoor
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