mat poochiye kya jeetne niklaa tha main ghar se | मत पूछिए क्या जीतने निकला था मैं घर से

  - Zia Farooqui
मतपूछिएक्याजीतनेनिकलाथामैंघरसे
मतपूछिएक्याहारकेलौटाहूँसफ़रसे
कुछमैंभीगिराँ-गोशथासुनहीनहींपाया
कुछवक़्तभीगुज़राहैदबेपाँवइधरसे
कलरातभीथाचौदहवींकाचाँदफ़लकपर
कलरातभीइकक़ाफ़िलानिकलाथाखंडरसे
इकअब्रकाटुकड़ाहैपरिंदाहैकितूहै
येकौनहैजोरोज़गुज़रताहैइधरसे
क्याजानेमुझेतख़्त-ए-सुलैमाँकहाँलेजाए
झपकीहीनहींआँखमिरीख़्वाबकेडरसे
देखातोकिसीआँखमेंहैरतभीनहींथी
ख़ालीथामिराखेलभीहरकैफ़-ओ-असरसे
सूरजकेतआ'क़ुबमेंहुआवोभीतह-ए-आब
इकशख़्स'ज़िया'साथथाहंगाम-ए-सहरस
  - Zia Farooqui
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