bas ek baar kisi ne gale lagaaya tha | बस एक बार किसी ने गले लगाया था

  - Zafar Iqbal
बसएकबारकिसीनेगलेलगायाथा
फिरउसकेबा'दमैंथामेरासायाथा
गलीमेंलोगभीथेमेरेउसकेदुश्मनलोग
वोसबपेहँसताहुआमेरेदिलमेंआयाथा
उसएकदश्तमेंसौशहरहोगएआबाद
जहाँकिसीनेकभीकारवाँलुटायाथा
वोमुझसेअपनापतापूछनेकोनिकले
किजिनसेमैंनेख़ुदअपनासुराग़पायाथा
मिरेवजूदसेगुलज़ारहोकेनिकलीहै
वोआगजिसनेतिरापैरहनजलायाथा
मुझीकोताना-ए-ग़ारत-गरीदेप्यारे
येनक़्शमैंनेतिरेहाथसेमिटायाथा
उसीनेरूपबदलकरजगादियाआख़िर
जोज़हरमुझपेकभीनींदबनकेछायाथा
'ज़फ़र'कीख़ाकमेंहैकिसकीहसरत-ए-तामीर
ख़याल-ओ-ख़्वाबमेंकिसनेयेघरबनायाथा
  - Zafar Iqbal
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