sardiyon ke mausam men pichhli raat ko chat par | सर्दियों के मौसम में पिछली रात को छत पर

  - Yusuf Kamran
सर्दियोंकेमौसममेंपिछलीरातकोछतपर
हमजोएकदूजेसेचाँदनीकीबारिशमें
बे-ज़बानजज़्बोंकीख़ुशबुओंसेमिलतेथे
हुस्न-ए-दिलरुबातेरालफ़्ज़कीहक़ीक़तसेकितनाबे-तअल्लुक़था
अन-कहासुनासबकुछलम्हा-ए-मसर्रतथा
जबसेलब-कुशाईकेसिलसिलेहुएजारी
तेरीमेरीबहसोंने
अन-कहासुनासबकुछ
मंतिक़ोंदलीलोंकेवाहिमोंसेगदलाया
औरफिरमोहब्बतकेसबगुलाबसँवलाए
आजअज्नबिय्यतकीबे-समरफ़ज़ाओंमें
हमकिएकदूजेसेकितनेबे-तअल्लुक़हैं
अव्वलींरिफ़ाक़तकीसारीख़स्लतेंखोकर
इसबिसात-ए-हस्तीपर
सिर्फ़दोपयादेहैं
  - Yusuf Kamran
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