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Yawar Amaan
paani aurat aur ghalaazat
paani aurat aur ghalaazat | पानी औरत और ग़लाज़त
- Yawar Amaan
पानी
औरत
और
ग़लाज़त
अक्सर
ख़्वाबों
में
आते
हैं
मुझ
को
परेशाँ
कर
जाते
हैं
औरत
एक
हयूला
सूरत
कभी
अजंता
की
वो
मूरत
कभी
कभी
जापानी
गुड़िया
कभी
वो
इक
सागर
शहज़ादी
आब-ए-रवाँ
के
दोष
पे
लेटी
मौजों
के
हलकोरे
खाती
साँप
की
आँखों
में
अँगारा
उस
की
हर
फुन्कार
में
वहशत
अपने
हर
अंदाज़
में
दहशत
कभी
वो
मुझ
पर
हमले
करता
कभी
मैं
उस
के
सर
को
कुचलता
धान
के
खेत
में
ठहरा
पानी
दरियाओं
में
बहता
पानी
लहराता
बल
खाता
पानी
तुग़्यानी
में
भँवर
बनाता
सैलाबों
में
शोर
मचाता
ग़ज़ब
में
फैलता
बढ़ता
पानी
कोड़ों
के
ढेरों
के
जैसा
ऊँचे
नीचे
टीलों
जैसा
मीलों
के
रक़्बे
में
फैला
देखता
हूँ
इंसानी
फुज़ला
कभी
तो
मैं
पाता
हूँ
ख़ुद
को
अपनी
ग़लाज़त
में
ही
लुथड़ा
कभी
मैं
अपने
हाथों
से
ही
घर
से
बाहर
फेंकता
देखूँ
अपने
घर
वालों
का
फुज़ला
कभी
कमोड
में
तैरता
देखूँ
कभी
तो
मेज़
पे
खाने
की
ही
कभी
किसी
दूजे
कमरे
में
अक्सर
अपने
कमरे
में
भी
अपने
बिस्तर
पर
ही
देखूँ
या
फिर
दूर
ख़लाओं
के
आँगन
से
अपने
घर
में
घुसता
देखूँ
ख़्वाबों
का
असरार
है
कैसा
ख़्वाबों
की
लज़्ज़त
है
कैसी
जिन
में
जकड़ा
सोचता
हूँ
मैं
वाक़ई
ये
सब
ख़्वाब
हैं
यावर
ख़्वाब-नुमा
कोई
बेदारी
या
बे-मंज़िल
रस्ता
कोई
या
फिर
एक
तिलिस्म
है
कोई
इक
दिन
फिर
ऐसा
होता
है
साँप
औरत
को
डस
लेता
है
पानी
में
ग़लाज़त
मिल
जाती
है
अब
बस
साँप
है
और
ग़लाज़त
पर
ये
शायद
ख़्वाब
नहीं
- Yawar Amaan
पेड़
का
दुख
तो
कोई
पूछने
वाला
ही
न
था
अपनी
ही
आग
में
जलता
हुआ
साया
देखा
Jameel Malik
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वो
आँखें
आपके
ग़म
में
नहीं
हुई
हैं
नम
दिया
जलाते
हुए
हाथ
जल
गया
होगा
Shadab Javed
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यहाँ
वो
कौन
है
जो
इंतिख़ाब-ए-ग़म
पे
क़ादिर
हो
जो
मिल
जाए
वही
ग़म
दोस्तों
का
मुद्दआ'
होगा
Jaun Elia
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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अब
क्या
ही
ग़म
मनाएँ
कि
क्या
क्या
हुआ
मियाँ
बर्बाद
होना
ही
था
सो
बर्बाद
हो
गए
shaan manral
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यही
बहुत
है
मिरे
ग़म
में
तुम
शरीक
हुए
मैं
हॅंस
पड़ूँगा
अगर
तुमने
अब
दिलासा
दिया
Imran Aami
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बारे
दुनिया
में
रहो
ग़म-ज़दा
या
शाद
रहो
ऐसा
कुछ
कर
के
चलो
याँ
कि
बहुत
याद
रहो
Meer Taqi Meer
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उठाओ
कैमरा
तस्वीर
खींच
लो
इन
की
उदास
लोग
कहाँ
रोज़
मुस्कराते
हैं
Malikzada Javed
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