asraar kaise khol doon us aab-o-gil ke main | असरार कैसे खोल दूँ उस आब-ओ-गिल के मैं

  - Yashab Tamanna
असरारकैसेखोलदूँउसआब-ओ-गिलकेमैं
महकाहुआहूँरातकीरानीसेमिलकेमैं
क्याजानिएकिकैसेपताचलगयाउसे
कहतानहींकिसीसेभीअहवालदिलकेमैं
ख़ाक-ए-शिफ़ाकहींकीभीआईनहींहैरास
अबआसमानपरकहींदेखूँगाखिलकेमैं
अबभीवहीहैप्यासकीशिद्दतवहीहूँमैं
पानीतोपहलेभीनहींपीताथाहिलकेमैं
चेहरेसेलगरहाथाकिपज़मुर्दगीसीहै
नख़रेउठारहाहूँदिल-ए-मुज़्महिलकेमैं
दमड़ीनहींहैजेबमेंलेकिनयेदिलतोहै
कोईभीदामदूँगा'यशब'उसकेतिलकेमैं
  - Yashab Tamanna
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