sukhun ko be-hisi ki qaid se baahar nikaaloon | सुख़न को बे-हिसी की क़ैद से बाहर निकालूँ

  - Yaqoob Yawar
सुख़नकोबे-हिसीकीक़ैदसेबाहरनिकालूँ
तुम्हारीदीदकाकोईनयामंज़रनिकालूँ
येबे-मसरफ़सीशयहरगामआड़ेआनेवाली
अनाकीकेंचुलीकोजिस्मसेबाहरनिकालूँ
तिलिस्मीमारकेकहतेहैंअबसरहोचुकेहैं
ज़राज़म्बीलकेकोनेसेमैंभीसरनिकालूँ
लहूमहकातोसाराशहरपागलहोगयाहै
मैंकिससफ़सेउठूँकिसकेलिएख़ंजरनिकालूँ
बसअबतोमुंजमिदज़ेहनोंकी'यावर'बर्फ़पिघले
कहाँतकअपनीइस्तेदादकेजौहरनिकालूँ
  - Yaqoob Yawar
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