na poochho zeest-fasaana tamaam hone tak | न पूछो ज़ीस्त-फ़साना तमाम होने तक

  - Yaqoob Aamir
पूछोज़ीस्त-फ़सानातमामहोनेतक
दु'आओंतकथीसहरऔरशामरोनेतक
मुझेभीख़ुदथाएहसासअपनेहोनेका
तिरीनिगाहमेंअपनामक़ामखोनेतक
हरएकशख़्सहैजबगोश्तनोचनेवाला
बचेगाकौनयहाँनेक-नामहोनेतक
चहारसम्तसेरहज़नकुछइसतरहटूटे
किजैसेफ़स्लकाथाएहतिमामबोनेतक
बतारहाहैअभीतकतिराधुलादामन
किदाग़भीहैंनुमायाँतमामधोनेतक
हज़ाररंग-ए-तमन्नाहज़ारपछतावे
अजबथाज़ेहनमेंइकइज़्दिहामसोनेतक
सुनाहैहमनेभीआज़ादथाकभी'आमिर'
किसीकीचाहकालेकिनग़ुलामहोनेतक
  - Yaqoob Aamir
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy