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Yamir Ahsan
paon chadar men simat sakte nahin
paon chadar men simat sakte nahin | पॉँव चादर में सिमट सकते नहीं
- Yamir Ahsan
पॉँव
चादर
में
सिमट
सकते
नहीं
शौक़
भी
तो
अपने
घट
सकते
नहीं
रास्तों
में
कुछ
गिराने
पड़
गए
जेब
में
सब
ख़्वाब
अट
सकते
नहीं
हम
मुसाफ़िर
हैं
तेरी
आवाज़
पे
रुक
तो
सकते
हैं
पलट
सकते
नहीं
- Yamir Ahsan
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इश्क़
में
गुज़रे
थे
ऐसे
इक
दौर
से
मैं
किसी
और
से
वो
किसी
और
से
कुछ
न
कुछ
मुश्किलें
ही
हुई
हैं
खड़ी
जब
भी
देखा
गया
है
मुझे
ग़ौर
से
मैंने
इज़हार
अब
कर
दिया
इश्क़
का
उसने
हाँ
भी
कहा
पर
किसी
और
से
हर
घड़ी
हिचकियाँ
आएँगी
बस
तुम्हें
मेरी
ग़ज़लें
पढ़े
जो
कोई
ग़ौर
से
हमने
दोहरा
लिए
पिछले
बाइस
बरस
रात
कटती
नहीं
ये
किसी
तौर
से
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एक
तू
है,
मुझे
तोड़
देता
है
हर
मर्तबा
एक
ये
आस
है
मेरी
जो
टूटती
ही
नहीं
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आपके
दीदार
पर
आलम
है
ऐसा
हमने
तो
पी
भी
नहीं
पर
हिल
रहे
हैं
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मेरे
दिन
इतनी
तेज़ी
से
ढलने
लगे
मैं
रुका
तो
मिरे
साए
चलने
लगे
जिस
किसी
के
लिए
अपनी
मुट्ठी
कसी
हाथ
से
रेत
जैसे
फिसलने
लगे
तुम
भी
अच्छे
लगे
थे
मुझे
दूर
से
तुम
भी
नज़दीक
आकर
बदलने
लगे
वक़्त
ने
वक़्त
ऐसा
दिखाया
हमें
जो
उगलते
थे
हम
वो
निगलने
लगे
बे-वफ़ाई
पे
इक
शे'र
क्या
पढ़
दिया
लोग
कुर्सी
पे
चढ़
कर
उछलने
लगे
खेलने
का
कभी
शौक़
बदला
नहीं
सिर्फ़
अपने
खिलौने
बदलने
लगे
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एक
दम
पाक
हो
गया
हूँ
मैं
ख़ाक
था
ख़ाक
हो
गया
हूँ
मैं
इश्क़
में
डूबना
ही
छोड़
दिया
अच्छा
तैराक
हो
गया
हूँ
मैं
तुम
थे
तो
खौफ़
था,
तुम्हें
खो
कर
कितना
बेबाक
हो
गया
हूँ
मैं
तीर
सबने
चलाए
हैं
मुझ
पर
आम
सा
ताक
हो
गया
हूँ
मैं
मैं
किसी
पर
भी
जच
नहीं
पाता
कैसा
पोशाक
हो
गया
हूँ
मैं
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Yamir Ahsan
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