tamasha hai ghazal meri use izhaar mat samjho | तमाशा है ग़ज़ल मेरी उसे इज़हार मत समझो

  - YAAR
तमाशाहैग़ज़लमेरीउसेइज़हारमतसमझो
सुनाताहूॅंयहाँजोभीउसेकिरदारमतसमझो
किसीकेख़ूब-सूरतबोलकोतुमप्यारमतसमझो
मिलाहैबातकरनेकोउसेतुमयारमतसमझो
तुम्हेंहरफ़लसफ़ाउसकीनज़रसेमिलगयाहोगा
अगरवोआँखभरकेदेखलेअख़बारमतसमझो
बहुतथकसागयाहूँज़िंदगीआरामकरनेदो
उदासीशख़्सियतमेंहैमुझेबीमारमतसमझो
तुम्हारेसामनेपर्दाकरेयाहुस्नदिखजाए
निशाँगुज़रेमगरतुमजिस्मकाहक़दारमतसमझो
मुदावाआपकेहरज़ख़्महरतकलीफ़काहोगा
कभीअपनेख़ुदाकोबे-ख़बरबेज़ारमतसमझो
सहरतकमैंयहींज़िंदारहूँगातुमचलीआना
यहाँमरनातुम्हारेहाथसेबेकारमतसमझो
सभीकाएकदिनमरकरचलेजानामुयस्सरहै
कभीइनमक़्तलोंकोफूलसेगुलज़ारमतसमझो
कहोगीक्यारहेनाकामहमवा'दानिभानेमें
तुम्हेंमालूमहैसबकुछहमेंमक्कारमतसमझो
भटकताहूॅंबनारसकीगलीबाज़ारमेंदरदर
यहाँपेहरकिसीकोतुमनिगाह-ए-यारमतसमझो
  - YAAR
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