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Ganesh gorakhpuri
deepak jalaakar ham manaaenge diwali kii khushi
deepak jalaakar ham manaaenge diwali kii khushi | दीपक जलाकर हम मनाएँगे दिवाली की ख़ुशी
- Ganesh gorakhpuri
दीपक
जलाकर
हम
मनाएँगे
दिवाली
की
ख़ुशी
मुझको
बहाना
चाहिए
बस
छत
पे
जाने
के
लिए
- Ganesh gorakhpuri
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होने
दो
चराग़ाँ
महलों
में
क्या
हम
को
अगर
दीवाली
है
मज़दूर
हैं
हम
मज़दूर
हैं
हम
मज़दूर
की
दुनिया
काली
है
Jameel Mazhari
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रात
की
भीगी-भीगी
मिट्टी
से
कुछ
उजाले
उगा
रही
होगी
मेरी
दुनिया
में
करके
अँधियारा
वो
दिवाली
मना
रही
होगी
Tanveer Ghazi
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हमारे
लोग
अगर
रास्ता
न
पाएँगे
शिलाएँ
जोड़
के
पानी
पे
पुल
बनाएँगे
फिर
एक
बार
मनेगी
अवध
में
दीवाली
फिर
एक
बार
सभी
रौशनी
में
आएँगे
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Amit Jha Rahi
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दिवाली
भी
दिवाली
अब
नहीं
है
तुम्हारे
साथ
हर
दिन
थी
दिवाली
Tanoj Dadhich
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जो
न
खेली
होली
'अमृत'
के
साथ
में
हाथों
में
दीवाली
तक
गुलाल
रहेगा
Amritanshu Sharma
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हर
गीत
में
हर
बार
गाऊँगा
तुझे
अपनी
ग़ज़ल
में
गुनगुनाऊँगा
तुझे
तू
ईद
है
और
तू
ही
दीवाली
मेरी
मैं
हर
बरस
यूँँही
मनाऊँगा
तुझे
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Krishnakant Kabk
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मेहनत
तो
करता
हूँ
फिर
भी
घर
ख़ाली
है
बाबूजी
मिट्टी
के
कुछ
दीपक
ले
लो
दीवाली
है
बाबूजी
मिट्टी
बेच
रहा
हूँ
जिस
में
कोई
जाल
फ़रेब
नहीं
सोना
चाँदी
दूध
मिठाई
सब
जा'ली
है
बाबूजी
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Gyan Prakash Akul
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दिवाली
भी
दिवाली
अब
नहीं
है
तुम्हारे
साथ
हर
दिन
थी
दिवाली
Tanoj Dadhich
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मैं
चाहता
हूँ
इक
मुसलमां
दोस्त
हो
मेरा
मेरे
मकाँ
में
ईद
हो
उसके
दिवाली
हो
Siddharth Saaz
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आज
की
रात
दिवाली
है
दिए
रौशन
हैं
आज
की
रात
ये
लगता
है
मैं
सो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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ज़िन्दगी
के
मंच
पर
किरदार
पूरा
हो
गया
है
ये
सभी
ताली
बजाएँगे
यक़ीं
है
अब
हमें
भी
Ganesh gorakhpuri
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सभी
ने
था
सिखाया
झूठ
बोलो
तभी
सच
बोलकर
हम
मुस्कुराए
Ganesh gorakhpuri
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आँसुओं
को
रोक
के
कुछ
इस
क़दर
मैंने
रखा
था
डेहरी
में
हो
रखा
जैसे
अनाजों
को
सजोकर
Ganesh gorakhpuri
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बेवजह
ही
मुस्कुराकर
देखना
है
दोस्त
को
अब
आज़मा
कर
देखना
है
बोलते
सब
हैं
बुरा
इंसान
हर
दम
पर
गले
उसको
लगाकर
देखना
है
आज
तक
समझा
नहीं
मैं
बे-वफ़ा
को
दिल
मुझे
भी
अब
जलाकर
देखना
है
एक
ख़्वाहिश
को
मुकम्मल
चाहता
हूँ
टूटता
रिश्ता
बचाकर
देखना
है
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Ganesh gorakhpuri
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दोनों
लोगों
के
दरमियान
कुछ
था
फिर
भी
हम
चुप
थे
कुछ
बादशाह
हैं
दुनियां
में
जो
बदनसीब
होते
हैं
Ganesh gorakhpuri
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