dagaa har ik ki aadat hai | दग़ा हर इक की आदत है

  - Avinash Chaudhary
दग़ाहरइककीआदतहै
यहाँयेहीरिवायतहै
ज़मींपरबैठजाताहूँ
फ़क़ीरोंकीसीआदतहै
जोदिलसेटीसउठतीहै
उसीमेंमेरीराहतहै
मुझेख़ुदसनहींहोती
तुम्हेंमुझसेेमोहब्बतहै?
मैंअबख़ामोशरहताहूँ
तुम्हेंअबभीशिकायतहै?
वहाँपरएकदिनहोगा
यहाँहरदिनक़यामतहै
जहाँदिलकामुक़दमाहो
कोईऐसीअदालतहै?
येदिलतुमतोड़सकतेहो
तुम्हेंइतनीइज़ाज़तहै
नहींहटतीनज़रउससे
वोइतनीख़ूब-सूरतहै
  - Avinash Chaudhary
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