dasht men jab hawaaein kheenchti hain | दश्त में जब हवाएँ खींचती हैं

  - Amaan Haider
दश्तमेंजबहवाएँखींचतीहैं
हरदिएकीशुआएँखींचतीहैं
चाँदकानूरखींचेचेहरातेरा
औरज़ुल्फ़ेंघटाएँखींचतीहैं
छोड़करयारोंकोजाऊँमगर
जान-ए-दिलकीअदाएँखींचतीहैं
जानिब-ए-दश्तख़्वाब-गहसेमुझे
फिरकिसीकीसदाएँखींचतीहैं
अबतोलाज़िमहैटूटजानामेरा
मुझकोचारोंदिशाएँखींचतीहैं
इनखिलौनोंकीक्यूँदुकानोंसे
अपनेबच्चोंकोमाएँखींचतीहैं
मुझकोहरबारमुश्किलोंसे"अमान"
मेरीमाँकीदुआएँखींचतीहैं
  - Amaan Haider
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