kabootar maqbaro'n par raat din | कबूतर मक़बरों पर रात दिन

  - Wazir Agha
कबूतरमक़बरोंपररातदिन
दिनरातरहतेहैं
मुसाफ़िरचलतेरहतेहैं
कबूतरदूधऐसेपर
सियहदीवारकीजालीसेआती
धूपकीकंघीसे
जबहमवारकरतेहैं
तोबूढ़ेमक़बरोंपर
काईकेजंगलमहकतेहैं
मुसाफ़िरचलतेरहतेहैं
येबंजारे
जिन्हेंबसचंदलम्हेहीठहरनाहै
उन्हेंरोकोनहीं
येमौसमीआबीपरिंदेहैं
जिन्हेंमैलेपरोंकेसाथउड़नाहै
उन्हेंरुकनानहींआता
उन्हेंरुकनानहींआता
  - Wazir Agha
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