गोरी-चट्टीयालघनीसी
दूधऐसीपोशाकबदनकी
लाम्बेनाज़ुकमाथेपरमेहंदीकाघाव
उड़ती-गिरतीख़ाकसुमोंकी
मुट्ठी-भरकरमुँहपरमिलकरदिलकीप्यासबुझाओ
सदियोंकेदुखझेलतेजाओ
रहेसफ़रमें
हरेमहकतेखेतोंमेंख़ुश-बाशफिरे
अपनेपीछेआतीक़ुव्वतकेनशेमेंखोया
रस्तेकेहरभारीपत्थरकोठोकरसेतोड़े
आगेहीआगेकोदौड़े
आजयहाँतकआपहुँचाहै
परवोकलअबदूरनहींहै
जबउसकेक़दमोंकेभाले
क़र्याक़स्बाशहरसभीको
पल-भरमेंमिस्मारकरेंगे
हरशयकोताराजकरेंगे
इसमरक़दसे
उसमरक़दतक
राजकरेंगे
औरफिरवोदिनभीआएगा
जबइकतेज़सुनहरानश्तर
शह-ए-रगमेंइसकीउतरेगा
ख़ूनकाफ़व्वाराछूटेगा
औरवोक़ुव्वत
रेंगतीऔरफुँकारतीक़ुव्वत
मौजमेंआकरनाचउठेगी
ख़ुशीसेपागलहोजाएगी