gori-chatti yaal ghani si | गोरी-चट्टी याल घनी सी

  - Wazir Agha
गोरी-चट्टीयालघनीसी
दूधऐसीपोशाकबदनकी
लाम्बेनाज़ुकमाथेपरमेहंदीकाघाव
उड़ती-गिरतीख़ाकसुमोंकी
मुट्ठी-भरकरमुँहपरमिलकरदिलकीप्यासबुझाओ
सदियोंकेदुखझेलतेजाओ
रहेसफ़रमें
हरेमहकतेखेतोंमेंख़ुश-बाशफिरे
अपनेपीछेआतीक़ुव्वतकेनशेमेंखोया
रस्तेकेहरभारीपत्थरकोठोकरसेतोड़े
आगेहीआगेकोदौड़े
आजयहाँतकपहुँचाहै
परवोकलअबदूरनहींहै
जबउसकेक़दमोंकेभाले
क़र्याक़स्बाशहरसभीको
पल-भरमेंमिस्मारकरेंगे
हरशयकोताराजकरेंगे
इसमरक़दसे
उसमरक़दतक
राजकरेंगे
औरफिरवोदिनभीआएगा
जबइकतेज़सुनहरानश्तर
शह-ए-रगमेंइसकीउतरेगा
ख़ूनकाफ़व्वाराछूटेगा
औरवोक़ुव्वत
रेंगतीऔरफुँकारतीक़ुव्वत
मौजमेंकरनाचउठेगी
ख़ुशीसेपागलहोजाएगी
  - Wazir Agha
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