कभीख़ुश्कमौसममेंपुर्वाजोचलती
तोबंजरपहाड़ोंघनेगर्द-आलूदशहरोंसेकतराके
हमतकपहुँचती
हमेंतुंदयादोंकेगिर्दाबमैं
डूबतेऔरउभरतेहुएदेखकरहमसेकहती
मैंउनसबकेजिस्मोंसेमसहोकेआईहूँ
उनकेपसीनेकीख़ुश्बूको
अपनेलिबादेमेंभरकर
हथेलीपेरखकरमैंलाईहूँ
कभीसुर्ख़सूरजनिकलता
तोहमउससेकहते
तुम्हारीदहकतीहुईआँखकाराज़क्याहै
वोकहता
मैंइनसबकीआँखोंकेग़ुर्फोंसे
येसारीउजलीतमाज़तचुरातारहाहूँ
मैंदरयूज़ा-गरउनचराग़ोंसेख़ुदकोजलातारहाहूँ
उन्हेंहमनेढूँडा
कभीसब्ज़शबनमकेछींटोंमेंतारोंकीरोतीहुईअंजुमनमैं
कभीसुब्हकीक़त्ल-गाहशबकेघाइलबदनमें
उन्हेंहमनेआवाज़दीकू-ब-कू
ग़ममेंडूबीहुईबस्तियोंसेअटेख़ाक-दान-ए-वतनमें
मगरवोनहींथेकहींभीनहींथे
कहींउनकेक़दमोंकीहल्कीसीआवाज़तकभीनहींथी
फिरइकरोज़धरतीकामौसमजोबदला
तोबादलनेशानोंसेहमकोहिलाकरजगाया
कहाउनकेआनेकापैग़ामआया
चहकतेपरिंदोंनेशाख़ोंसेउड़कर
हवाओंमेंइकदायरासाबनाया
कहाउनकेआनेकापैग़ामआया
धनकसातरंगोंमेंलिपटीहुई
इककमाँबनकेज़ाहिरहुई
हमसेकहनेलगीअपनीआँखोंसेदेखाहैमैंनेउन्हें
तेज़क़दमोंसेआतेहुए
शामहँसनेलगी
उसकीआँखोंमेंख़ुशियोंकेआँसूथे
आरिज़पेशबनम
नगीनोंकीसूरतचमकनेलगीथी