नजाने
सरगोशियोंमेंकितनीकहानियाँअन-कहीहैंअबतक
बरहनादीवारपरटँगेपुर-कशिशकैलेंडरमें
दाएरेकानिशान
उम्र-ए-गुरेज़-पाकोदवामकेख़्वाबदेगयाहै
जिसमेंसुलगतेसय्यारे
गेसुओंकेघनेख़ुनुकसाएढूँडतेहैं
गुलाब-साँसोंसे
जैसे
शादाबियोंकीतख़्लीक़होरहीहै
वोझुककेफूलोंमेंअपनेभीगेबदनकीख़ुशबूकोबाँटतीहै
चमनसेजातीबहार
इकटोकरीमेंमहफ़ूज़होगईहै