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Wajid Husain Sahil
lakdi ki taigh waale vo ghaazi kahaan ga.e
lakdi ki taigh waale vo ghaazi kahaan ga.e | लकड़ी की तैग़ वाले वो ग़ाज़ी कहाँ गए
- Wajid Husain Sahil
लकड़ी
की
तैग़
वाले
वो
ग़ाज़ी
कहाँ
गए
जन्नत
के
दा'वेदार
मजाज़ी
कहाँ
गए
रमज़ान
में
तो
आख़िरी
सफ़
तक
जगह
न
थी
अब
ख़ाली
मस्जिदें
हैं,
नमाज़ी
कहाँ
गए
- Wajid Husain Sahil
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बदल
गए
मेरे
मौसम
तो
यार
अब
आए
ग़मों
ने
चाट
लिया
ग़म-गुसार
अब
आए
Farhat Abbas Shah
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हमारा
काम
तो
मौसम
का
ध्यान
करना
है
और
उस
के
बाद
के
सब
काम
शश-जहात
के
हैं
Pallav Mishra
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उम्र-भर
के
सज्दों
से
मिल
नहीं
सकी
जन्नत
ख़ुल्द
से
निकलने
को
इक
गुनाह
काफ़ी
है
Ambreen Haseeb Ambar
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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तुम्हारे
पाँव
क़सम
से
बहुत
ही
प्यारे
हैं
ख़ुदा
करे
मेरे
बच्चों
की
इन
में
जन्नत
हो
Rafi Raza
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मिरी
ज़बान
के
मौसम
बदलते
रहते
हैं
मैं
आदमी
हूँ
मिरा
ए'तिबार
मत
करना
Asim Wasti
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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ग़ुंचा
ओ
गुल
माह
ओ
अंजुम
सब
के
सब
बेकार
थे
आप
क्या
आए
कि
फिर
मौसम
सुहाना
आ
गया
Asad Bhopali
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लब-ए-दरिया
पे
देख
आ
कर
तमाशा
आज
होली
का
भँवर
काले
के
दफ़
बाजे
है
मौज
ऐ
यार
पानी
में
Shah Naseer
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दरिया
के
किनारे
पे
मिरी
लाश
पड़ी
थी
और
पानी
की
तह
में
वो
मुझे
ढूँड
रहा
था
Adil Mansuri
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इस
क़दर
सख़्त
ज़ालिम
थी
उसकी
नज़र
सारे
तावीज़
ओ
दम
बेअसर
ही
रहे
Wajid Husain Sahil
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एक
मुद्दत
की
रियाज़त
का
सिला
है
'साहिल'
मेरे
अश'आर
जो
लोगों
की
ज़बाँ
तक
पहुँचे
Wajid Husain Sahil
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मैं
तो
पहुँचा
वहाँ
लम्हों
में,
करम
है
उसका
लोग
बरसों
का
सफ़र
कर
के
जहाँ
तक
पहुँचे
Wajid Husain Sahil
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दिल
के
एहसास
को
क्यूँँ
हाजत-ए-गोयाई
हो
इश्क़
सादिक़
हो
तो
इज़हार
का
मोहताज
नहीं
Wajid Husain Sahil
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ज्ञान
पर
अभिमान
का
जो
इक
उदाहरण
हो
गया
और
फिर
अपने
पतन
का
ख़ुद
ही
कारण
हो
गया
क्या
अजब
इस
में
कि
इक
रावण
था
जो
ज्ञानी
हुआ
पर
अजब
तो
ये
है
इक
ज्ञानी
भी
रावण
हो
गया
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Wajid Husain Sahil
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