gar teraa dar khula nahin hota | गर तेरा दर खुला नहीं होता

  - Wajid Husain Sahil
गरतेरादरखुलानहींहोता
फिरकोईआसरानहींहोता
तबभीकश्तीख़ुदाचलाताहै
जबकोईना-खु़दानहींहोता
बीचकाकोईरास्ताहीनहीं
प्यारहोताहैयानहींहोता
दिलसेकहताहूँमैं,मिराहोजा
परवोकहताहैजा,नहींहोता
अक़्लयेबार-बारकहतीहै
दिलकिसीकासगानहींहोता
मतकहींढूँढ़जाकेखु़शहाली
माँकेक़दमोंमेंक्यानहींहोता
आओउल्फ़तजहानमेंबाँटें
नफ़रतोंसेभलानहींहोता
मरकेभीमुल्ककीवफा़ओंका
क़र्ज़हमसेेअदानहींहोता
नर्मलहजेमेंबातकरनेसे
कामदुनियामेंक्यानहींहोता
फिरनवाफ़िलकाज़िक्रक्या'साहिल'
फ़र्ज़तुझसेेअदानहींहोता
  - Wajid Husain Sahil
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